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युवाओं में बढ़ती नशे की लत रोकने को करना होगा साझा प्रयास

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चौ. बंसीलाल पार्क में संवाद कार्यक्रम के दौरान युवाओं में बढ़ते नशे की लत विषय पर विचार विमर्श कर? - फोटो : Bhiwani
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आज 10वीं से 12वीं तक बच्चे भी पार्कों, स्कूल मैदान में इंजेक्शन, दवाइयों व अन्य तरह-तरह के नशे में फंसे है। युवाओं में तो यह आंकड़ा काफी ज्यादा है। नशे में फंसे युवा न केवल अपना करियर बर्बाद कर रहे हैं बल्कि अभिभावकों की उम्मीदों को भी धूमिल कर रहे है। नशे से किसी का भला नहीं हुआ, नशा करने वाले का सामाजिक और नैतिक दोनों ही पतन निश्चित है। नशे में युवा न केवल अपना नाश करता है बल्कि परिवार भी इसका शिकार होता है। यह बात चौ. बंसीलाल पार्क में अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में युवाओं ने रखी।
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युवाओं का मानना है कि अभिभावक अपने बच्चों की ख्वाहिशें पूरी करने में ही व्यस्त न रहें, बल्कि अपने बच्चों की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखें। उनके बच्चे कर क्या रहे हैं, उनकी संगत क्या है। आज हालात ये हैं कि जब तक बच्चों को अभिभावक संभालते हैं तब तक बच्चा नशे में पूरी तरह डूब चुका होता है, फिर उस नशे की लत को छुड़वा पाना भी संभव नहीं होता। इससे बेहतर है कि समय रहते नशे के प्रति अभिभावक और बच्चे सजग रहें। कभी शौक और कभी गलत संगत भी नशे की गर्त में युवा पीढ़ी को धकेल रही हैं, बुरे लोगों की संगत में पड़कर अधिकांश बच्चे बुरी आदतों व नशे की लतों का शिकार हो जाते हैं।
आज हर कोई तनाव मेें जी रहा है। यही तनाव नशे की ओर ले जाता हैं। हम युवा खूब कोशिश कर लें, मगर नशे की तरफ खिंचाव बढ़ने लगता है। इस उम्र में हर कोई नया कर गुजरने की ख्वाहिश लेकर चलता है। नशा भी इसमें एक ऐसा ही पहलु हैं, जिसका स्वाद एक बार चखता है तो फिर इसका आदी होता ही चला जाता है। नशे से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि युवा अपने आपको तनाव से दूर रखें और शरीर की ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में इस्तेमाल करें। खेल, शिक्षा इसका बेहतर ऑप्शन है।
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- सुनील पहलवान, खिलाड़ी।
हम अपने दोस्तों और आसपास के माहौल से घिरे रहते हैं। इसमें सबसे जरूरी हैं कि हमारे दोस्त किस तरह की सोच रखते हैं और वो कैसे माहौल में पल बढ़ रहे हैं। जिसका असर हमारी दिनचर्या पर भी पड़ता है। जो युवा अच्छी संगत और अच्छे संस्कारों के साथ जीवन जीता है, नशा उसे छू भी नहीं सकता। जबकि जिस वस्तु के सेवन से खुद को नुकसान हो उससे हमेशा दूर रहने में ही भलाई है। अभिभावक भी अपने बच्चों को अच्छे और बुरे का सही आंकलन करना सिखाएं तो बेहतर होगा।
- मोहित, छात्र।
अच्छे खिलाड़ी व सेहतमंद युवा भी कई बार नशे की लत की वजह से अपना शरीर और मान मर्यादा के साथ प्रतिष्ठा खो बैठते हैं। ये युवा सब कुछ हासिल करने की ललक में सब कुछ गंवा बैठते हैं। क्योंकि नशे से हमेशा ही नाश हुआ है, किसी का भला नहीं। ये बात अच्छी तरह समझनी होगी। मेरा मानना है कि अभिभावक भी बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें, वे खुद को कमाने और बच्चों का पालन करने तक ही सीमित ना रहें, बल्कि उनके हर बात और आदत में भागीदारी निभाएं।
- पंकज, युवा खिलाड़ी।
बहुत से युवा तो शौक के लिए नशा करते हैं। शुरूआत में तो यह अच्छा लगता हैं, मगर बाद में बदहाली और मौत की वजह भी बन जाता है। इसमें खुद का शरीर खोखला करने के बाद सामाजिक प्रतिष्ठा भी दाव पर होती है। हमें चाहिए कि सांझी भागेदारी से समाज व युवा वर्ग को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रयास करें। पुलिस और प्रशासन केवल जागरूकता तो कर सकता हैं, मगर नशे से दूर रहने के लिए खुद की समझ काम करेगी। नशे के कारोबारियों पर भी पुलिस प्रशासन सख्ती से नकेल कसे, ताकि युवा वर्ग का भटकाव न हो।
- रिंकू, युवा।
हर गली मोहल्ले में नशे के कारोबारियों का जाल फैला हुआ है। नशा आसानी से युवाओं को उपलब्ध हो जाता है। जो चीज आसानी से मिलती है उसका इस्तेमाल भी उतना ही ज्यादा होता है। यही हाल नशे का है। युवाओं को अपने ही आसपास नशे की तलब मिटाने के लिए नशीली चीजें मिल रही हैं, जिन पर प्रशासन और सरकार की भी कोई बंदिश काम नहीं कर रही है। पुलिस प्रशासन नशे के कारोबारियों को न केवल पकड़कर जेल डाले, बल्कि भविष्य में वो लोग ऐसा ना करें, इसके भी पुख्ता इंतजाम करे। वहीं अभिभावक भी बच्चों के प्रति सजग रहें।
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- विवेक, छात्र।
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