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Bhiwani News: सीवर व पेयजल लाइनों के काम अटके, अधिकारी कर रहे अमृत द्वितीय की मंजूरी का इंतजार

Sun, 14 Jul 2024 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। अमृत प्रथम फेज का काम पूरा हो चुका है, लेकिन अधिकारी अभी अमृत द्वितीय चरण की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं, जिसकी वजह से शहर के अंदर सीवर और पेयजल लाइनों का काम भी अटका हुआ है।
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भिवानी शहर में 93 करोड़ के बजट से अमृत प्रथम में आधे शहर में बरसाती पानी की निकासी, जलघर के टैंक निर्माण, इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन व बरसाती डिस्पोजलों का निर्माण हुआ है। लेकिन पुराने शहर के अंदर अब भी करीब 45 साल पुरानी पानी और सीवरेज की जर्जरहाल लाइनें हैं, जिन्हें बदला जाना बेहद जरूरी हो गया है। इन लाइनों की लीकेज से पुराना शहर की करीब सवा लाख की आबादी पानी के साथ जहर गटक रही है।
भिवानी शहर के अंदर करीब 11 किलोमीटर दायरे में जर्जरहाल सीवरलाइन और करीब 15 किलोमीटर दायरे में खस्ताहाल पानी की लाइनों को बदला जाना है। जिसका सर्वेक्षण भी हो चुका है और मसौदा भी सरकार के समक्ष मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है। अब इस मसौदे में मुख्यालय से किन बिंदुओं पर अड़चन होगी और किन बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। अभी इस पर मंथन होना भी बाकी है।
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अधिकारियों ने अभी प्रारंभिक मसौदा ही मुख्यालय भेजा है, जिस पर अभी अंतिम मंजूरी की मुहर लगना और बजट मंजूर होना बाकी है। अगर सरकार से इस मसौदे में देरी होती है तो फिर ये आचार संहिता के फेर में भी उलझ सकता है, क्योंकि आने वाले करीब ढाई माह बाद चुनावी गतिविधियां भी तेज हो जाएंगी। ऐसे में शहर के सीवर और पानी के मास्टर प्लान का काम भी उलझ सकता है।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के लाइन शिफ्टिंग के मसौदे भी मुख्यालय में अटके
शहर के अंदर कई विकास कार्य चल रहे हैं। इसमें अहम है रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण का काम। दिनोद रोड पर रेलवे ओवरब्रिज कार्य में कुछ हिस्से में अभी भी पानी और सीवर की लाइनों को शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने मसौदा मुख्यालय भेजा हुआ है। मगर अभी तक उसे मंजूरी नहीं मिली है। इस तरह के कई ऐसे छोटे कार्यों के टेंडर कराने के मसौदे भी मुख्यालय में लंबित पड़े हैं, जिन पर जल्द काम होना जरूरी है।

आधे शहर में बरसाती पानी निकासी की नहीं है व्यवस्था
अमृत प्रथम चरण में करीब आधे शहर में बरसाती पानी की निकासी के लिए लाइनें डाली जा चुकी हैं। मगर आधा शहर अब भी बरसाती पानी की निकासी के लिए पुराने सीवरेज और खुले नालों पर ही निर्भर है। आधे शहर में भूमिगत नई पाइप लाइन डालकर उसका एसटीपी तक निकासी का प्रबंध भी बाकी है। ये काम भी अमृत द्वितीय फेज में होना है। मानसून के दौरान अब भी करीब आधे शहर में बरसाती जलभराव होता है। इन हिस्सों में पानी की निकासी बारिश के चार से पांच घंटों बाद ही हो पाती है। इनमें शहर का दिनोद गेट, खाकी बाबा मंदिर क्षेत्र, जैन चौक, बावड़ीगेट क्षेत्र का इलाका शामिल है।


लाइनों पर सिर्फ छोटे काम ही करा रहे हैं अधिकारी
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग शहर में फिलहाल छोटे काम ही करा रहा है। इसमें कहीं कोई सीवर मैनहोल ठप है तो उसकी रिपेयरिंग कराना। कहीं लाइन बंद है तो उसकी जगह नई पाइप डलवाना। इस तरह के काम केवल मरम्मत पर ही निर्भर है, जबकि शहर के पुराने सीवरेज और पेयजल सिस्टम को नए सिरे से बदलने का कोई भी मसौदा अभी सिरे नहीं चढ़ा है। इसी वजह से शहरवासी पेयजल और सीवरेज संबंधी समस्याएं लंबे अर्से से झेलते आ रहे हैं।


अमृत द्वितीय चरण के काम का मसौदा मुख्यालय भेजा हुआ है। द्वितीय चरण में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग खुद शहर के अंदर पुरानी सीवर और पानी की लाइनों को बदलने के अलावा बूस्टिंग और पंपिंग स्टेशनों के निर्माण कार्य कराने के साथ बचे हुए शहर में बरसाती पानी की निकासी की भी व्यवस्था कराएगा। जैसे ही बजट मंजूर होगा, उसके बाद इन कार्यों को कराने की प्रक्रिया को शुरू कराया जाएगा।
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-सुनील कुमार रंगा, कार्यकारी अभियंता, शहरी सीवरेज शाखा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भिवानी।
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