भिवानी के गांव बामला के जलघर टैंक में जमा गंदगी। जागरूक पाठक
भिवानी। गांव बामला के जलघर में पानी जहर बनकर बह रहा है और ग्रामीण पिछले करीब एक दशक से इस दूषित पानी को पीने को मजबूर हैं। जलघर की दयनीय स्थिति और प्रशासनिक अनदेखी के कारण गांव में खुजली, त्वचा एलर्जी और अन्य गंभीर बीमारियां फैलने लगी हैं। वेटरन संगठन भिवानी के प्रधान सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल ने ये आरोप लगाए हैं।
उन्होंने बताया कि गांव के जलघर में कुल सात टैंक हैं जिनमें से पिछले 10 वर्षों से एक बूंद भी पानी नहीं आया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि जलघर में कोई फिल्टर सिस्टम मौजूद नहीं है,जिससे पानी को साफ करने का कोई साधन नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पानी की भारी कमी के कारण हाल ही में बारिश के पानी में भरे दूषित और रासायनिक युक्त पानी को जलघर के दो टैंकों में डाला गया जो अत्यंत हानिकारक है और गांव में सप्लाई किया जा रहा है। इसी दूषित पानी के कारण बच्चों और बुजुर्गों में खुजली, स्किन एलर्जी और अन्य बीमारियां फैल रही हैं।
उन्होंने बताया कि जलघर में एक अंडरग्राउंड वाटर टैंक भी मौजूद है जिसमें पानी भरा हुआ है लेकिन ढक्कन नहीं होने के कारण टैंक खुला रहता है और पक्षियों ने इसमें बसेरा बना लिया है। ग्रेवाल ने कहा कि इस गंभीर पेयजल संकट और दूषित जल सप्लाई की समस्या से सांसद को कई बार अवगत कराया गया लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।