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Bhiwani News: संघर्ष की सीमाओं को लांघकर सीमा ने रच दिया इतिहास

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सीमा 
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भिवानी। चरखी दादरी की बेटी और भिवानी के गांव दिनोद की बहू सीमा सांगवान ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में 58.65 मीटर थ्रो कर कांस्य पदक जीता है। शुक्रवार को गांव और जिलेभर में खुशी का माहौल रहा। उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा और परिजनों ने मिठाइयां बांटीं। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू) के शारीरिक शिक्षा विभाग से पीएचडी कर रहीं सीमा को कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। सीमा की इस उपलब्धि के पीछे वर्षों का संघर्ष, अनुशासन और कठिन परिश्रम छिपा है।
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सीमा ने बताया कि उनके परिवार में कोई भी सरकारी नौकरी में नहीं है। पति रविंद्र और वह स्वयं बेरोजगार है। इसके बावजूद परिवार ने कभी उनकी पढ़ाई और खेल में कमी नहीं आने दी। उन्होंने कहा कि परिवार के सहयोग और अपने आत्मविश्वास की बदौलत ही वह राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने में सफल रही हैं। सीमा के ससुर भूप सिंह, जेठानी शारदा और ग्रामीण सोमबीर व सुभाष ने कहा कि सीमा की मेहनत ने गांव, जिले, प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। पति एवं कोच रविंद्र ने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए उन्होंने लंबे समय तक कड़ी मेहनत की। उनका अगला लक्ष्य एशिया कप में पदक जीतना है। सीमा का विवाह वर्ष 2019 में हुआ था। मां बनने के बावजूद उन्होंने खेल और पढ़ाई को जारी रखा।

कोरोना काल में भी नहीं छोड़ा अभ्यास
सीमा ने कोरोना महामारी के दौरान जब खेल गतिविधियां पूरी तरह बंद थीं तब भी अभ्यास जारी रखा। मैदान उपलब्ध नहीं होने पर वह घर और आसपास उपलब्ध संसाधनों के सहारे अभ्यास करती रहीं। मातृत्व के बाद भी परिवार, पीएचडी की पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।
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ग्लासगो में उठाया भीम स्टेडियम की बदहाली का मुद्दा
शहर के भीम स्टेडियम खेल परिसर की बदहाल स्थिति का मुद्दा ग्लासगो में भी उठा। कांस्य पदक जीतने के बाद पत्रकारों ने जब सीमा से पूछा कि हरियाणा में खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए क्या किया जाना चाहिए तो उन्होंने सबसे पहले भिवानी के भीम स्टेडियम की स्थिति सुधारने की मांग उठाई। सीमा ने कहा कि उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत भीम स्टेडियम से की है। वहां ट्रैक की स्थिति में सुधार, योग्य कोच उपलब्ध कराने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने की जरूरत है।
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