भिवानी। आढ़तियों और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी एजेंसियों की ओर से खरीदी गई 55 हजार क्विंटल सरसों कम हो गई है। मामला सामने आने के बाद अपनी खाल बचाने के लिए सरकारी एजेंसियों की ओर से आढ़तियों को नोटिस जारी किए जाने के साथ ही नया खेला शुरू हो गया है। सरकारी सरसों की घटती पूर्ति करने के लिए अब मंडी में ही मिलावट का खेल चल रहा है। अधिकारियों की नाक तले मंडी में ही सरसों में झार मिलावट का खेल चल रहा है। जूई मंडी में हजारों क्विंटल सरसों में झार की मिलावट करने का वीडियो वायरल होने के बाद भारतीय किसान संघ ने इसकी शिकायत उपायुक्त को भेजी है।
भारतीय किसान संघ ने इसी मसले को लेकर जींद में एक जून को प्रदेशस्तरीय बैठक बुलाई है। इसमें इस गड़बड़झाले के खिलाफ आंदोलन की भी रूपरेखा तय होगी। दरअसल, सरकारी सरसों में मिलावटखोरी की आशंका सभी मंडियों में है, क्योंकि जिले में करीब 55 हजार क्विंटल सरसों गायब है, इस सरसों की पूर्ति अब झार यानी तेल मिलों से सरसों झराई के बाद बचा हुआ अवशेष मिलाया जा रहा है। मंडियों में रोजाना झार के चार से पांच ट्रक पहुंच रहे हैं। अधिकांश मिलावटी सरसों को तो अधिकारियों से मिलीभगत कर गोदामों तक भी पहुंचा दिया गया है, जिसकी अगर विजिलेंस जांच कराई जाए तो सरकार को करोड़ों का चूना लगाए जाने का भी बड़ा खेल उजागर होगा।
दरअसल, हरियाणा वेयर हाउस कारपोरेशन ने भिवानी, तोशाम, बहल और सिवानी मंडी में सरसों की सरकारी खरीद कराई थी। जबकि हैफेड ने बवानीखेड़ा, चांग, खरक कलां, ढिगावा, जूई और लोहारू मंडी में सरसों की सरकारी खरीद कराई है। शुरुआत में तो भिवानी चारा मंडी में हैफेड ने भी किसानों की सरसों की सरकारी खरीद की थी। फिलहाल बवानीखेड़ा, चांग, खरक कलां मंडियों से सरसों की उठान हो चुकी है। वहीं ढिगावा मंडी में अभी भी 40 हजार कट्टे सरसों पड़ी है। इसी तरह जूई मंडी में भी करीब 75 हजार कट्टों का उठान होना बाकी है।
वायरल वीडियो में जूई मंडी में खुले पड़े सरसों के ढेर के अंदर झार के काफी कट्टों की मिलावट की गई हैं, ये झार करीब 50 क्विंटल तक आंकी गई है। बड़े स्तर पर मिलावट को हैंडलिंग एजेंट द्वारा सरकारी खरीद में आ रही घटती की खानापूर्ति से जोड़ा जा रहा है। इसकी भनक लगने के बाद भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री व बिजली आयाम प्रमुख महीपाल श्योराण भी मौके पर पहुंचे थे।
मैंने खुद जूई मंडी में पहुंचकर सरकारी सरसों के अंदर झार मिलावट पर संज्ञान लिया है। हमने इसकी शिकायत उपायुक्त को दी है। वहीं किसानों को बदनाम करने और किसानों को भुगतान में हो रही देरी पर विजिलेंस जांच की मांग उठाई है क्योंकि जब आढ़तियों ने खरीद के बाद सरकार को सरसों दी ही नहीं तो किसानों को भुगतान कहां से होगा। इस मामले में एक जून को जींद में प्रदेश स्तरीय बैठक में बड़ा निर्णय लेकर आंदोलन की रूपरेखा तय करेंगे। इस खेल में शामिल अधिकारियों और मिलावटखोरों को बख्शा नहीं जाएगा। ये खेल सभी मंडियों में बड़े स्तर पर चल रहा है, इसमें प्रशासन और अधिकारियों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है।
- महीपाल श्योराण, प्रदेश मंत्री, भारतीय किसान संघ।
मंडियों में अधिकांश सरसों की उठान हो चुकी है। जूई मंडी में अगर इस तरह का कोई मामला है तो उसे चेक कराएंगे। गोदामों में भी सरसों की जांच की जा रही है, उसके बाद ही उसका भंडारण किया जा रहा है। अभी तक कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है।
- संदीप पूनिया, जिला प्रबंधक हैफेड, भिवानी।