भिवानी। नागरिक अस्पताल में करीब दो साल से रखीं ब्लड सेपरेटर मशीनें अब तक चालू नहीं हो पाई हैं। हालांकि मशीनों को इंस्टॉल तो कर दिया गया है, मगर लाइसेंस नहीं मिलने के कारण इन्हें शुरू नहीं किया गया है।
खास बात यह है कि इस दौरान तीन सीएमओ बदल चुके हैं। स्थानीय अधिकारी इसके लिए विभाग को कई बार पत्र भी लिख चुके हैं, मगर अभी तक मांग पूरी नहीं की गई है।
मरीज को जब भी रक्त की जरूरत होती है तो उसे पूरा रक्त नहीं चाहिए होता है। उसे रक्त का विशेष हिस्सा चाहिए होता है। रक्त के अलग-अलग हिस्से ब्लड सेपरेटर मशीन में किए जाते हैं। नागरिक अस्पताल में यह मशीन तो है, मगर इसको शुरू नहीं किया गया है। यही कारण है कि जब भी किसी को रक्त की जरूरत पड़ती है तो उसे निजी ब्लड बैंकों की ओर दौड़ लगानी पड़ती है।
निजी अस्पताल के मरीजों को देना होता है शुल्क
सरकारी अस्पताल में दाखिल मरीजों को ब्लड की जरूरत पड़ने पर ब्लड सेंटर से निशुल्क रक्त दिया जाता है, जबकि निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए रक्त की जरूरत पड़ने पर 1050 रुपये फीस निर्धारित की गई है। नागरिक अस्पताल में स्थापित ब्लड सेंटर में 5000 यूनिट ब्लड स्टोर किया जाता है, जोकि रक्तदान शिविर के माध्यम से ही लिया जाता है। वर्ष भर में यह 5000 यूनिट ब्लड मरीजों को निशुल्क दिया जाता है। रक्त कोष विभाग में ब्लड को सुरक्षित रखने के लिए सभी ग्रुप की यूनिट को अलग-अलग करके तीन फ्रिजों में रखा जात है।
जानिए कंपोनेंट प्लाजमा की कब पड़ती है जरूरत
ब्लड के कंपोनेंट प्लाज्मा की जरूरत बर्न केसों में होती है। प्लेटलेट्स की जरूरत रक्त में इनकी कमी होने पर पड़ती है। डेंगू संक्रमण के दौरान लोगों में प्लेटलेट्स की भारी कमी आई थी। पैक्ड रेड सेल्स की जरूरत शरीर में रक्त कम होने पर पड़ती है।
जल्द मिलेगी सुविधा
विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क साधकर जल्द से जल्द मशीनों को शुरू करवाने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही नागरिक अस्पताल में भी मरीजों को ब्लड सेपरेटर मशीन की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सीएमओ, भिवानी।