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Bhiwani News: आधे शहर में नहीं बरसाती पानी निकासी की व्यवस्था, योजना में उलझे रहे अधिकारी

Mon, 16 Sep 2024 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। आधे शहर में बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। संबंधित विभागों के अधिकारी भी योजना में उलझे हैं। पिछले पांच सालों से नेता भी शहरी दायरे में बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था कराने के दावे करते नहीं थक रहे हैं, लेकिन कोई भी मसौदा अभी तक सिरे नहीं चढ़ा है।
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वहीं लोगो के लिए परेशानी यह है कि थोड़ी सी बारिश में ही शहर की सड़कें दरिया बन जाती हैं। घरों के अंदर भी पानी घुस जाता है। जबकि आधे शहर में ही बारिश के पानी की निकासी के लिए अलग से ड्रेनेज सिस्टम बना है।
भिवानी शहर में 91 करोड़ के बजट से अमृत प्रथम चरण में आधे शहर से बरसाती पानी की निकासी के लिए पाइप लाइन डाली गई है। जबकि दो बरसाती डिस्पोजलों का भी निर्माण हुआ है। इसी बजट में पेयजल जरूरतों और बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था कराई गई। लेकिन अब भी करीब आधा शहर बारिश के पानी में जलभराव की समस्या झेल रहा है।
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बारिश के पानी का अतिरिक्त दबाव भी इन हिस्सों की सीवरेज लाइन पर ही है। अचानक बारिश आने पर गंदे पानी के साथ बारिश के पानी की निकासी में भी चार से पांच घंटे लग जाते हैं। अब अमृत द्वितीय चरण का काम जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के हाथों में सौंपा है। सर्वेक्षण का काम भी हो चुका है। अधिकारियों ने प्रारंभिक खाका तैयार कर मसौदा भी मुख्यालय भेजा है। लेकिन इस मसौदे पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है न ही बजट की मंजूरी मिली है। ऐसे में आधा शहर पांच सालों तक जलभराव का दंश ही झेलता रहा है।

शहर के अधिकांश निचले इलाकों में दशकों बाद भी बरसाती पानी की निकासी की समस्या से निजात नहीं मिली है। अधिकारी भी केवल कागजी कार्रवाई में ही उलझे रहे हैं, यहां शहर के हालात थोड़ी सी बारिश में ही बिगड़ रहे हैं। पांच सालों तक किसी ने कोई सुध नहीं ली है। अगर शहर के अंदर बारिश के पानी की निकासी के लिए अलग से लाइन डाली जाती है तो बारिश के दौरान सड़कों को नुकसान होने से भी बचा जा सकता है।
- अमरजीत।
बारिश के दौरान घरों के अंदर तक पानी घुस जाता है। निचले इलाकों में तीन से चार फूट पानी जमा रहता है। यहां बारिश के पानी की निकासी के लिए अलग से कोई लाइन नहीं है। बारिश का पानी सीवर लाइन के जरिए ही जाता है। सीवर पहले से ही ठप पड़े हैं, ऐसे में लोग जलभराव की समस्या भी झेल रहे हैं। अधिकारी केवल दावा करने तक ही सीमित हैं, जबकि राजनेता भी उनके इन हालातों की कोई सुध नहीं ले रहे हैं।
-सुरेंद्र।
शहर के जैन चौक, बावड़ीगेट, दादरी गेट, हालुवास गेट के अलावा अग्रसेन चौक, महम गेट, महम रोड क्षेत्र में बरसाती पानी की निकासी के लिए अलग से कोई लाइन नहीं है। यहां जलभराव बना रहता है। यहां के लिए अलग से बरसाती पानी की निकासी और डिस्पोजल निर्माण की मांग भी उठ रही है, लेकिन अभी तक किसी भी योजना के सिरे चढ़ने की कोई उम्मीद नहीं है। संबंधित विभागों में भी कोई तालमेल नहीं है। ऐसे में सीवर तो ठप पड़े ही हैं, सड़कें भी टूटी हैं। इससे राहगीरों को आवागमन में भी बड़ी दिक्कतें आती हैं।
- संदीप।
बरसाती पानी की निकासी के लिए लाइन अलग से डालने के लिए सर्वे तो हो चुका है, मगर इस सर्वेक्षण का कोई नतीजा अभी तक नहीं निकला है। शहर जलभराव का दंश झेल रहा है, अधिकारी केवल पानी निकासी के लिए अस्थायी बंदोबस्त कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। विभाग को चाहिए कि पूरे शहर से बारिश के पानी की निकासी स्थायी रूप से होनी चाहिए। इसके लिए समय रहते सरकार के समक्ष मसौदा तैयार कर भेजे।
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- प्रदीप।
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