भिवानी। किसानों की फसलों पर इनदिनों मौसम काफी भारी पड़ा है, बावजूद इसके किसान अपनी फसल कटाई में जुटे हैं। सरकार अभी तक ढुलाई के टेंडर भी नहीं करा पाई है न ही खरीद की कोई तैयारी है। प्रदेशभर की मंडियों में फसल की सरकारी खरीद से पहले ढुलाई के टेंडर कराए जाने अनिवार्य हैं।
छह मार्च को सरकारी खरीद के लिए नोडल एजेंसी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने ढुलाई टेंडर कराने के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन इक्का दुक्का एजेंसियों ने ही आवेदन किए, जिससे नॉर्म पूरे नहीं होने पर टेंडर नहीं हो पाए। अब 18 मार्च को फिर से प्रदेशभर की मंडियों के लिए ढुलाई टेंडर जिला मुख्यालयों पर कराए जाएंगे। फिलहाल ढुलाई टेंडर नहीं होने और मंडियों में फसल खरीद का कोई शेड्यूल नहीं आने से किसानों के साथ आढ़ति भी असमंजस में हैं।
चुनावी माहौल के बीच इस बार किसानों की फसल खरीद होनी है। ऐसे में खरीद शुरू होने से करीब एक या डेढ़ माह पहले ही ढुलाई के टेंडर कराने अनिवार्य होते हैं। इसी के साथ सरकारी खरीद एजेंसियों को भंडारण के लिए भी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर इसकी रिपोर्ट भी मुख्यालय को देनी अनिवार्य हैं। लेकिन अभी तक दोनों ही कार्य नहीं हुए हैं। इसी के साथ मंडियों में खरीद का शेड्यूल भी नहीं आया है। इसकी वजह से हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड अधिकारियों ने आढ़तियों को खरीद कार्य के लाइसेंस जारी कर उन्हें खरीद के लिए तैयारी करने की हिदायतें दी हैं। वहीं खरीद एजेंसी हैफेड और हरियाणा वेयर हाउस के पास अभी खरीद का कोई शेड्यूल नहीं है। जब तक खरीद का शेड्यूल और मंडियां एजेंसियों को निर्धारित नहीं की जाती तब तक एजेंसी भी यह तय नहीं कर पा रही हैं कि किस मंडी में कितने किसानों के लिए व्यवस्था करनी होगी।
वहीं बारदाना को लेकर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। गेहूं से पहले मंडियों में सरसों की फसल पहुंचेगी। फिलहाल कुछ किसान तो अपनी सरसों लेकर मंडियों में आने लगे हैं, ये किसान अपने पिछले साल की सरसों या फिर अगेती बिजाई की सरसों ही ला रहे हैं।
मंडियों में खरीद की गई फसल को गोदामों तक पहुंचाने के लिए ढुलाई कार्य के टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। पहले छह मार्च को टेंडर कॉल किए थे, लेकिन नॉर्म पूरे नहीं होने की वजह से अब 18 मार्च को टेंडर प्रक्रिया पूरी कराने की तैयारी की जा रही है। जल्द ही ढुलाई कार्य के टेंडर हो जाएंगे।
-केके गोयल, जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी, भिवानी।