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जिरह से उजागर होगी सच्चाई : अधिवक्ता राजकुमार

Mon, 19 May 2025 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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एडीआर सेंटर भिवानी के सभागार में अ​धिकारियों को निर्देश देते सीजेएम पवन कुमार। 
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भिवानी। एडीआर सेंटर के सभागार में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसमें रिसोर्स पर्सन रहे अधिवक्ता राजकुमार गुगनानी ने बताया कि जिरह सच्चाई को उजागर करने का सशक्त माध्यम और न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता लाने का प्रभावी साधन है। अधिवक्ताओं को कई बार असहयोगी गवाहों, जटिल केस फाइलों और समय सीमा के दबाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सही रणनीति और अनुभव ही सफलता की कुंजी बनते हैं।
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अधिवक्ता राजकुमार ने जिरह की तैयारी, प्रभावी पूछताछ की तकनीक और शैली, कमजोर गवाहों से पूछताछ करते समय विशेष सावधानियां, कानूनी नैतिकता और पेशेवर आचरण के नियम, विधिक सहायता मामलों में जिरह की भूमिका बताई। हर केस में जिरह की जरूरत और उसकी सीमा को समझना जरूरी है। जब गवाह कमजोर हो, तो पेशेवर और नैतिक मूल्यों का पालन जरूरी हो जाता है।
सीजेएम कम सचिव पवन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस शिविर में सभी कानूनी सहायता रक्षा सलाहकारों और अधिकारियों को महत्वपूर्ण प्रक्रिया की गहन जानकारी दी गई। हिसार के अधिवक्ता संधीर भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग से जुड़े। उन्होंने बताया कि कई परिस्थितियों में अत्यधिक जिरह बुरा प्रभाव डाल सकती है। इससे बचने के लिए वकीलों को संतुलन बनाकर काम करना चाहिए।
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अधिवक्ता संधीर ने विधिक सहायता मामलों को संभालने वाले बचाव पक्ष के वकीलों को सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि वे केस की प्रकृति, गवाह की मानसिक स्थिति और अदालत की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए संबंधित पक्षों से पूछताछ करें।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि हर जिरह का उद्देश्य गवाह की विश्वसनीयता की जांच करना है, न कि उसे डराना या भ्रमित करना। अदालत में नैतिक सीमाओं का पालन करके ही प्रभावी अधिवक्ता बना जा सकता है। कानून की सेवा करते समय सामाजिक न्याय का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।


महिलाओं ने सीखी हस्तशिल्प कला की बारीकियां
लोहारू। वस्त्र मंत्रालय के अधीन विकास आयुक्त हस्तशिल्प कार्यालय और हस्तशिल्प सेवा केंद्र रेवाड़ी के तकनीकी मार्गदर्शन में गांव सोहांसड़ा में 50 दिवसीय डिजाइन एवं तकनीकी विकास कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का समापन शनिवार को हुआ। इस दौरान 30 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हस्तशिल्प कला के तहत दरी बनाना सिखाया गया।

विकास आयुक्त हस्तशिल्प पैनल डिजाइनर निष्ठा चुघ और मास्टर क्राफ्ट पर्सन मुनेश ने कारीगरों को डिजाइन, नवाचार, रंग संयोजन, कच्चे माल की गुणवत्ता, उत्पादन प्रक्रिया, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स से जुड़ना सिखाया।
समापन सत्र में समाजसेवी निदेशक सीबी शर्मा और बैंक प्रबंधक आरएल जांगड़ा ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। प्रशिक्षुओं को मुद्रा योजना के तहत ऋण सह अनुदान योजना का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
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