भिवानी। पंचांग के अनुसार इस साल फाल्गुन पूर्णिमा तीन मार्च को ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण भारत में खग्रास रूप में दिखाई देगा। खगोलविद इसे ब्लड मून भी कह रहे हैं, क्योंकि इस दौरान चंद्रमा का रंग लाल दिखाई देगा। पंडित महेश शर्मा ने बताया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में घटित हो रहा है। इसके अनुसार सिंह राशि व लग्न के जातकों के लिए यह समय मानसिक उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है, अतः गुस्से पर काबू रखना शुभ होगा। नक्षत्र के स्वामी शुक्र हैं, जो प्रेम और रिश्तों से जुड़े ग्रह हैं। ऐसे में पति-पत्नी या प्रेम संबंधों में गलतफहमी या ईगो की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण दोपहर 03:19 पर प्रारंभ होगा और सांय 06:47 पर मोक्ष होगा। हालांकि, भारत में यह ग्रहण चंद्रोदय के समय ही मोक्ष रूप में दिखाई देगा। देश के सभी नगरों में इसका प्रारंभ, मध्य तथा मोक्ष रूप देखा जा सकेगा। भारत के अतिरिक्त यह ग्रहण संपूर्ण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिण अमेरिका व अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। पंडित महेश शर्मा ने कहा कि सिंह राशि और पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातकों के लिए चंद्र, राहु और शिव का जप व दान कल्याणकारी रहेगा।
इस प्रकार रहेगा ग्रहण का सूतक
शास्त्रानुसार चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण से 9 घंटे पूर्व ही लग जाता है। इस ग्रहण का सूतक 03 मार्च 2026 को सुबह 06:20 पर प्रारंभ होगा। सूतक से पहले दूध-दही, अचार, मुरब्बा, चटनी में तुलसी दल या कुशातृण रखना शुभ है। सूखे खाद्य पदार्थों में कुशा डालने की आवश्यकता नहीं है। ग्रहण काल में स्नान, दान, जप-पाठ, मंत्र एवं स्तोत्र पाठ करना लाभकारी होगा। सूतक और ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श, धार्मिक अनुष्ठान, अनावश्यक खान-पान, मैथुन, निद्रा, नाखून काटना आदि वर्जित है। गर्भवती महिलाओं को ग्रहणकाल में सब्जी काटने, पापड़ सेंकने तथा उत्तेजित कार्यों से परहेज रखना चाहिए और धार्मिक ग्रंथ का पाठ करते हुए प्रसन्नचित रहना चाहिए। वृद्ध, रोगी, बालक एवं गर्भवती स्त्रियों को यथासंभव अनुकूल भोजन और दवाई लेना चाहिए।