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Bhiwani News: जिले को मेडिकल कॉलेज मिला, डिप्टी सिविल सर्जन और पीएमओ सहित 33 सीनियर मेडिकल ऑफिसर के पद सालभर से खाली

Fri, 27 Dec 2024 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। जिले को मेडिकल कॉलेज तो मिला लेकिन वास्तव में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से लड़खड़ा चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग में नौ डिप्टी सिविल सर्जन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी के साथ 33 सीनियर मेडिकल ऑफिसर के पद साल भर से खाली पड़े हैं।
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इनमें कई पद तो करीब दो से तीन साल से खाली हैं। इतना ही नहीं जिले में मेडिकल ऑफिसर के भी 80 पद खाली पड़े हैं। बिना चिकित्सकों के पीएचसी और सीएचसी में भी चिकित्सा सेवाएं रामभरोसे हैं। हालांकि स्वास्थ्य निदेशालय ढांचागत सुविधाओं पर जोर देने में लगा हैं, मगर साल भर से विभाग एक भी नया चिकित्सक नियुक्त नहीं कर पाया है। जो चिकित्सक सरकारी सेवाएं छोड़कर जा चुके हैं, उनके नाम सिर्फ कागजों में आज भी चल रहे हैं।
भिवानी जिले में जिला मुख्यालय के नागरिक अस्पताल सहित राजकीय नेत्र अस्पताल और चार सब डिविजनल अस्पताल हैं। इसके अलावा जिले में पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिले में 208 मेडिकल ऑफिसर में 105 मेडिकल ऑफिसर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जबकि मेडिकल ऑफिसर के 80 पद लंबे अर्से से खाली पड़े हैं।
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मेडिकल ऑफिसर नहीं होने से सब डिविजनल अस्पतालों में आने वाले गंभीर मरीजों को रेफर अस्पताल ही माना जा रहा है, क्योंकि वहां इलाज कम रेफर ज्यादा किया जाता है। जिला मुख्यालय के अस्पताल में मार्च 2024 के बाद से ही प्रधान चिकित्सा अधिकारी नहीं हैं। ऐसे में कार्यवाहक पीएमओ के सहारे ही व्यवस्था चलाई जा रही है।

मेडिकल कॉलेज के तीनों खंड बनकर तैयार, चालू होने का अब भी इंतजार
भिवानी जिले में जुलाई 2021 में मेडिकल कॉलेज निर्माण शुरू हुआ था। मेडिकल कॉलेज के तीनों खंड बनकर तैयार हो चुके हैं, लेकिन इसके चालू होने का अब भी इंतजार बना है। हालांकि मेडिकल कॉलेज परिसर में जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी को शिफ़्ट किया जाना भी प्रस्तावित है, लेकिन इसे भी अब तक तकनीकी दिक्कतों की वजह से मंजूरी नहीं मिली है। फिलहाल जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में भी कई चिकित्सक नहीं हैं, जिनमें चर्म रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, रेडियोथैरेपी, कम्युनिटी मेडिसन, पब्लिक हेल्थ, ओएमएफएस के पद खाली पड़े हैं। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिला मुख्यालय पर 720 बेड का अस्पताल बन चुका है। मेडिकल कॉलेज में नए विशेषज्ञ चिकित्सक मिलेंगे तभी जिले में लड़खड़ा रही चिकित्सा सुविधाएं थोड़ी सुधरेंगी।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कर्मचारी ही देते हैं मरीजों को दवा
ग्रामीण क्षेत्र में तो स्वास्थ्य सेवाओं का और भी बुरा हाल हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तो कर्मचारी ही चिकित्सक की जगह मरीजों को दवा देते हैं। आम तौर पर खांसी जुकाम और बुखार पीड़ित को वहां एमपीएचडब्ल्यू ही दवाई दे देता है। जबकि चिकित्सक नहीं होने की वजह से गंभीर मरीजों को पहले सामुदायिक और फिर जिला मुख्यालय के अस्पताल भेजा जाता है। घायलों को भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार नहीं मिल पाता है। ये गंभीर हालत में जिला मुख्यालय के अस्पताल के आपात विभाग में ही लाए जाते हैं।

मरीजों को पीजीआई ले जाने में ही उखड़ रहा एंबुलेंस का दम
स्वास्थ्य विभाग के पास गंभीर मरीजों को समय पर उपचार दिलाने व सड़क हादसों को समय रहते अस्पताल पहुंचाने के लिए रेफर ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाया हुआ है। इसमें अधिकांश एंबुलेंस मरीजों को रोहतक पीजीआई ले जाने में ही हॉफ जाती हैं, क्योंकि पुरानी गाड़ियों का बीच में ही दम उखड़ने लगता है। हालांकि विभाग एंबुलेंस को एक निर्धारित किलोमीटर चलने के बाद ही कंडम घोषित करता है। लेकिन ये गाड़ियां रिपेयरिंग के सहारे ही चलाई जा रही हैं। विभाग के पास करीब 27 से अधिक एंबुलेंस गाड़ी हैं।

बलियाली और ओबरा गांव में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
इस साल गांव बलियाली और ओबरा में नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की शुरुआत की गई है। इन दोनों ही गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुलने से गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण व बच्चों के टीकाकरण के लिए अब दूसरे गांव तक दौड़ नहीं लगानी पड़ती है। जबकि गांव में मरीजों को प्राथमिक चेकअप के लिए भी दूसरे गांव तक नहीं जाना पड़ता।

ये मिलेगी सौगात
जिले में गांव दुल्हेडी और ईशरवाल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने का प्रस्ताव भी स्वास्थ्य महानिदेशालय को भेजा गया है। लोहारू सब डिविजनल अस्पताल 50 बेड का है। लेकिन सीएम घोषणा में इसे भी 100 बेड का किया जाना अभी बाकी है। इसका प्रस्ताव भी मुख्यालय में भेजा हुआ है। बहल व खरक गांव की पीएचसी भी अपग्रेड की जानी है। बवानीखेड़ा और मानहेरू, बामला व सूई गांव में अस्पताल के नए भवन निर्माण किए जाएंगे।

जिला नागरिक अस्पताल की लैब में पुरानी मशीनों से ही हो रही जांच
जिला नागरिक अस्पताल की लैब में अधिकांश मशीनें पुरानी हैं। 2011 के बाद लैब में बहुत कम टेस्टिंग मशीनें आई हैं। पुरानी मशीनें अधिकांश समय खराब ही पड़ी रहती हैं। इसकी बदौलत मरीजों को भी बाहर से निजी लैब में महंगे टेस्ट कराने पर मजबूर होना पड़ता है। लैब में नई मशीनों के लिए स्वास्थ्य अधिकारी मुख्यालय से भी लगातार पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन नई मशीन की मंजूरी नहीं मिल रही है।

नागरिक अस्पताल में सीढ़ियां नाप हाफ रहे मरीज
जिला नागरिक अस्पताल में करीब चार दशक पुराना लिफ्ट सिस्टम लगा हुआ है। ये सिस्टम अधिकांश खराब ही पड़ा रहता है। नागरिक अस्पताल की लिफ्ट खराब रहने से मरीज और उनके तीमारदार भी सीढि़यां नाप हाफ रहे हैं। अस्पताल में पुराने लिफ्ट सिस्टम को रिपेयरिंग के सहारे ही चलाया जा रहा है। जबकि नई लिफ्ट लगाने का प्रस्ताव भी मुख्यालय को भेजा हुआ है।

मेडिकल कॉलेज नहीं इलाज के लिए चाहिए डॉक्टर
सरकार हर जिले में मेडिकल कॉलेज तो खोल रही हैं, लेकिन एक भी नया डॉक्टर अस्पतालों में नहीं आ रहा है। मेडिकल कॉलेज के बजाय डॉक्टर भर्ती किए जाए जो लोगों का इलाज कर सकें। अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होने की वजह से ही लोग बाहर महंगा इलाज करा रहे हैं। गंभीर मरीजों को उपचार के लिए पीजीआई जाना पड़ता है। नागरिक अस्पताल तो केवल रेफरल अस्पताल ही बनकर रह गए हैं। संगठन की तरफ से आरटीआई मांगी गई थी, जिसमें खुद स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों की भारी कमी होने की पुष्टि की है। जिन चिकित्सकों को पीएचसी और सीएचसी पर तैनात किया हुआ है, ये चिकित्सक जिला मुख्यालय पर कार्यालय में बैठकर प्रशासनिक कार्य निपटा रहे हैं, ऐसे में मरीजों का कितना भला होगा, यह खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है। - बृजपाल सिंह परमार अध्यक्ष स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन।
गांव में पीएचसी नहीं है। बीरण में पीएचसी खुली हुई है। इलाज के लिए भी जिला मुख्यालय के अस्पताल जाना पड़ता है या तोशाम के अस्पताल में आना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं का भारी टोटा बना है। जिला मुख्यालय के अस्पताल में सुबह आते हैं तो शाम तक नंबर आता है। मरीजों की भीड़ ही इतनी ज्यादा होती है कि पांच से छह घंटे तो बारी आने का इंतजार करना पड़ता है। - रामकिशन निवासी दांग खुर्द।

हरियाणा सरकार ने गांव प्रेमनगर में मेडिकल कॉलेज बनाने का वादा किया था। इसके लिए ग्राम पंचायत ने भूमि भी मुहैया कराई थी। लेकिन मेडिकल कॉलेज शहर में बना दिया। गांवों में पहले से ही चिकित्सा सुविधाओं के लिए लोग तरस रहे हैं। जिला मुख्यालय के अस्पताल में तो मरीजों को केवल रेफर कर दिया जाता है, उपचार तो बहुत कम मिलता है। गांव की पीएचसी भी रामभरोसे ही चल रही हैं, जहां डॉक्टर है न स्टाफ। -रोहित निवासी प्रेमनगर।

बवानीखेड़ा, मानहेरू, बामला व सूई में बनेगा नया अस्पताल भवन
जिले में वर्तमान में एक जिला नागरिक अस्पताल, एक राजकीय नेत्र अस्पताल व 4 सब डिविजनल अस्पताल हैं। वहीं 27 प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर व 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। वर्ष 2024 में बलियाली व ओबरा दो नए प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा लोहारू सब डिविजनल अस्पताल को 100 बेड करने की योजना है। प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र बहल व खरक को अपग्रेड करने की योजना है। वहीं बवानीखेड़ा, मानहेरू, बामला व सूई अस्पताल भवन को नया बनाया जाएगा।

जिले में चिकित्सकों की स्थिति
जिले में सीनियर मेडिकल ऑफिसर के 22 पद स्वीकृत हैं, 10 पदों पर कार्यरत व 12 पद खाली हैं। वहीं डिप्टी सिविल सर्जन के 9 पद स्वीकृत हैं व सभी पद खाली हैं। इसके अलावा मेडिकल ऑफिसर के 208 पद स्वीकृत हैं व 128 पदों पर कार्यरत व 80 पद खाली हैं। लेकिन अंडर रिजाइन व छुट्टी होने के कारण 105 पदों पर ही मेडिकल ऑफिसर कार्य कर रहे हैं।


जिले में चिकित्सकों के पदों का विवरण



पद का नाम स्वीकृत पद भरे हुए पद खाली पद



एसएमओ 22 10 12

डीसीएस 09 00 09



एमओ 208 128 80



जिला नागरिक चौधरी बंसीलाल अस्पताल के पदों का विवरण



पद का नाम स्वीकृत पद भरे हुए खाली पद



पीएमओ 01 00 01

एसएमओ 08 06 02

डीएसएस 02 02 02
एमओ 66 40 26

सीनियर डेंटल सर्जन 01 01 00
डेंटल सर्जन 04 04 00

मेडिसिन चिकित्सक 04 01 03
छाती एवं टीबी 01 02 00

ब्लड 01 00 01
स्त्री रोग विशेषज्ञ 05 03 02

एनेस्थीसिया 05 02 03
बाल रोग विशेषज्ञ 04 01 03

सर्जन 04 02 02
हड्डी रोग विशेषज्ञ 04 03 01

नेत्र रोग विशेषज्ञ 04 01 03
ईएनटी 03 01 02

त्वचा रोग विशेषज्ञ 02 00 02
रेडियोलॉजी 02 03 00

पैथलॉजी 03 05 00
मनोरोग विशेषज्ञ 02 01 01


जिले में चिकित्सकों के खाली पदों के संबंध में मुख्यालय से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। इसके अलावा दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी इस साल बने हैं। जिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के भवन पुराने हैं, उनके नए भवन निर्माण का प्रस्ताव भी भेजा हुआ है। जिले में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार किया जा रहा है। जिला मुख्यालय का अस्पताल भी 720 बेड का किया गया है। - डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।
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