भिवानी। पुलिस विभाग में होमगार्ड पद पर तैनात जयवीर लंबोरिया के घर में जन्मी महिला मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया ने मात्र 16 वर्ष की आयु में ही मुक्केबाज बनने का सपना देखना शुरू कर दिया था। टेलीविजन पर अपने चाचा संदीप व प्रविंद्र की बाउट व उनको मेडल जीतते देख जैस्मिन ने मन में मुक्केबाज बनने की ठानी।
जैस्मिन बताती है कि ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतना ही मेरा एकमात्र सपना है। अगर मन में ठान लो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। थाईलैंड से ओलंपिक कोटा हासिल करने के बाद जैस्मिन फिलहाल घर पर ही रहकर सुबह-शाम अभ्यास कर रही है। पेरिस ओलंपिक में पदक पाने के लिए जबरदस्त पसीना बहा रही है। इसके लिए वह सुबह साढ़े पांच बजे ही अभ्यास करने जुट जाती है। सुबह दो घंटे साढ़े सात बजे तक अभ्यास करने के बाद दिन में आराम करती है। उसके बाद शाम को फिर से पांच बजे से साढ़े सात बजे तक निरंतर अभ्यास करने जुट जाती है।
जैस्मिन ने बताया कि कोच के रूप में उसे उसके चाचा संदीप से ही मार्गदर्शन मिला है। जिसके कारण उसे खेल की बारीकियां सीखने के लिए ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है। उसने सिर्फ लगातार उसके चाचा कोच संदीप के बताए अनुसार मेहनत पर ही ध्यान दिया है। पेरिस में पदक जितने के लिए जैस्मिन अगले एक या दो दिन में पटियाला कैंप के लिए रवाना होगी। पटियाला में अभ्यास करने के बाद दो जुलाई को जर्मनी ट्रैनिंग कैंप के लिए रवाना होंगी।
वहां पर विदेशी मुक्केबाजों के साथ टैनिंग कैंप में भारतीय मुक्केबाज पदक जीतने के लिए जी-जान से मेहनत करेंगे। 26 जुलाई से आरंभ होने वाले ओलंपिक मुकाबलों के लिए जैस्मिन को विश्वास है कि वह मेहनत के दम पर रिंग में उतरकर मेडल जीत लेगी। ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीत कर लाना ही मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया का एकमात्र सपना है।
ये हैं जैस्मिन की उपलब्धियां
- भारतीय सेना में पहली मुक्केबाज।
- 2019 में उदयपुर में हुए ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में 57 किलो भार वर्ग में गोल्ड।
- 2019 में मंगोलिया में हुई एशियन चैंपियनशिप 57 किलो भार वर्ग में कांस्य।
- 2021 में सीनियर एशियन चैंपियनशिप में 60 किलो भार वर्ग में कांस्य।
- 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 60 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक।