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Bhiwani News: भिवानी में पांच साल के बच्चे की बरामदगी के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

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सुशील वर्मा
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भिवानी। जिले में बहादुरगढ़ ट्रैफिक पुलिस के कर्मचारी के घर से पांच साल का बच्चा बरामद होने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कड़ा संज्ञान लिया है और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है। मंगलवार को हनुमान गेट क्षेत्र में स्ट्रेट क्राइम ब्रांच और बाल कल्याण समिति की संयुक्त टीम ने छापामारी कर ट्रैफिक पुलिसकर्मी के घर से बच्चे को बरामद किया था जहां मौके पर कोई वैध कानूनी दस्तावेज नहीं मिले थे और मामला बाल तस्करी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
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बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य एवं भिवानी जिले के गांव ढाणी माहू निवासी सुशील वर्मा ने इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पांच वर्षीय बच्चे को भिवानी में एक पुलिस कर्मचारी और उसके परिवार द्वारा अवैध रूप से अपने पास रखा गया था जहां उसे शारीरिक शोषण और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि बच्चे को बिना उचित दस्तावेज या कानूनी अभिभावकत्व के एक प्रमुख स्थानीय विद्यालय में दाखिला दिलाया गया जो किसी संगठित बाल तस्करी नेटवर्क की संलिप्तता की ओर इशारा करता है।
शिकायतकर्ता के अनुसार पुलिस, बाल कल्याण समिति और अन्य स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आयोग से निष्पक्ष जांच, कानूनी जवाबदेही तय करने, बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जांच पर किसी भी प्रकार के दबाव को रोकने की मांग की है।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया है। शिकायत की प्रति आयोग के महानिदेशक (आई) को भेजी गई है ताकि टेलीफोन के माध्यम से तथ्यों की जानकारी एकत्र कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके।

बुआ के लड़के ने गोद लिया, दस्तावेज नहीं बने
बहादुरगढ़ ट्रैफिक पुलिस में तैनात सोमबीर सिंह ने बताया कि बच्चा उसके पास पढ़ाई के लिए रह रहा था। पुलिसकर्मी के अनुसार बच्चे को उसकी बुआ के लड़के निडाना निवासी सुनील ने गोद लिया हुआ है। बच्चे के जन्म से जुड़े प्रमाणपत्र उनके पास हैं और जिससे बच्चा गोद लिया गया है उससे संबंधित लिखित दस्तावेज भी हैं। हालांकि, गोदनामे के संबंध में जानकारी न होने के कारण औपचारिक दस्तावेज तैयार नहीं किए गए।



मुझे संतोष है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। मुझे यह भी आशंका है कि यह मामला केवल एक घटना नहीं बल्कि इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क हो सकता है जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। मैं आयोग और राज्य सरकार से अपेक्षा करता हूं कि इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। -सुशील वर्मा, शिकायतकर्ता एवं पूर्व सदस्य, बाल अधिकार संरक्षण आयोग


यह मामला अत्यंत गंभीर है और मानवाधिकारों के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आता है। प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि बच्चे को अवैध रूप से अपने पास रखा गया तथा उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए भिवानी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है और सात दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही आयोग ने अपने जांच प्रकोष्ठ (इन्वेस्टिगेशन डिविजन) को भी निर्देशित किया है कि वे 24 घंटे के अंदर तथ्यों की पुष्टि कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें ताकि मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। -प्रियंक कानूनगो, सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग।


रेस्क्यू किए गए पांच साल के बच्चे को फिलहाल बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के संरक्षण में रखा गया है। बच्चे की वीरवार को काउंसिलिंग कराई जाएगी। काउंसिलिंग के बाद ही मामले से जुड़े तथ्य सामने आएंगे जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -प्रदीप तंवर, चेयरमैन, जिला बाल कल्याण समिति, भिवानी।

सुशील वर्मा

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