भिवानी। जिला नागरिक अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था ठिठुर रही है जबकि यहां दाखिल मरीज ठंड से बेड पर ही सिकुड़ गए हैं। अस्पताल के वार्डों में बाहरी खिड़कियों के शीशे भी टूटे पड़े हैं जिनसे अंदर ठंडी हवाएं बेड पर लेटे मरीज की बेचैनी और तकलीफ को भी बढ़ा रही है। हालत यह है कि दाखिल मरीजों के तीमारदार ही घर से कंबल लेकर आ रहे हैं उन्हें यहां ठंड से बचाव के लिए भी कोई सुविधा नहीं मिल रही है।
जबकि पिछले साल मरीजों को अस्पताल की तरफ से मुहैया कराए गए कंबलों को चूहों ने कुतर डाला था जिनके अंदर व्यवस्था का छेद दिखाई दे रहा था। ऐसे में अब फटेहाल कंबल भी स्टोर से बाहर नहीं निकले हैं। चार मंजिला अस्पताल भवन में हर मंजिल पर दो वार्ड बने हैं। वार्ड एक से लेकर वार्ड दस तक बनाए गए हैं। जबकि वार्ड एक से आठ वार्ड तक विशेषज्ञ चिकित्सकों के मरीजों को दाखिल करने के लिए बने हैं जबकि वार्ड नौ से दस स्पेशल वार्ड बनाए हुए हैं। जिन्हें जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाता है।
लेकिन स्पेशल वार्ड भी सिर्फ नाम के ही स्पेशल हैं जिनकी बाहरी तरफ की खिड़कियां तक गायब हैं। जिला अस्पताल परिसर में बंदरों का उत्पात हैं। उत्पाती बंदरों द्वारा मरीजों का खाना चुराने और अंदर दाखिल होने के लिए कई जगह शीशे भी चटका डाले हैं। हालांकि कई जगहों पर जालियां भी लगाई गई हैं। लेकिन इन जालियों के सहारे वार्डों में दाखिल मरीजों तक ठंड नहीं रोकी जा सकती है। वार्डों में दाखिल मरीज रात को तापमान गिरने और ठंडी हवा चलने के साथ ही अपने बेड पर एक कंबल के सहारे शरीर को सिकोड़कर ही रात बिताते हैं। मरीजों के साथ आने वाले तीमारदार तो वार्डों के बाहर लगी वेटिंग कुर्सियों पर लेट समय बिताते हैं। दाखिल मरीजों के बेड की चादर भी रोज नहीं बदली जा रही है। कई मरीजों को तो दो से तीन दिन में एक बार चादर बदलने का मौका मिलता है।
लॉड्री में भी पुरानी मशीनों के सहारे ही चल रहा धुलाई का काम
जिला नागरिक अस्पताल की खुद की लॉड्री है। लेकिन इसमें करीब ढाई दशक से अधिक पुराने मशीनें अक्सर खराब ही रहती है। इसमें खासकर सर्दी के मौसम में चादर सुखाने वाली मशीन काम नहीं करती है। ऐसे में इन्हें लॉड्री के अंदर ही रस्सी के सहारे टांग कर सुखाना पड़ता है। रोजाना वार्डों में करीब 500 से 700 चादर धुलाई के लिए आती हैं। मुश्किल से 250 से 300 ही यहां साफ हो पाती हैं। ज्यादा सर्दी और धुंध के मौसम में तो 200 से 250 चादर ही रोजाना साफ हो पाती हैं। जिसकी वजह से दाखिल मरीजों को रोजाना बेड पर चादर बदलने का मौका ही नहीं मिल पाता है।
न कंबल मिल रहे हैं, न समय पर दवाई
नागरिक अस्पताल में यहां ठंड से बचाव के लिए कंबल मिल रहे हैं न समय पर दवाई। दाखिल मरीजों को अपने ही हाल पर छोड़ दिया जाता है। चिकित्सक भी मर्जी हो तब आता है। यहां नर्सिंग स्टाफ ही उन्हें टोकने पर ही देखभाल के लिए आता है। अन्यथा अपने बेड पर मरीज अपने ही हाल पर पड़ा रहता है। अस्पताल में मेडिकल कॉलेज जैसी कोई सुविधा अभी नहीं है। -ईश्वर जूई, निवासी
बंदरों के उत्पात से परेशान हैं मरीज
दिनभर बंदर गलियारों की टूटे पड़े शीशे के अंदर से अंदर पहुंच जाते हैं और खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं। रात को इन टूटी खिड़कियों के अंदर से ही ठंडी हवा आती है। एक कंबल के सहारे ही रात गुजारनी पड़ती है। ज्यादा बिस्तर घर से इसलिए नहीं लाते हैं कि उन्हें वापस ले जाने में भी परेशानी आती है। वे मरीज को संभाले या फिर अपना सामान। -बंसी पिलानी, निवासी
घायल मरीजों को भी नहीं मिल रहा राहत
घायल मरीजों को वार्ड में दाखिल तो कर दिया जाता है, लेकिन यहां उन्हें सर्दी से बचाव के लिए कुछ नहीं मिलता है। टूटी पड़ी खिड़कियों के अंदर से ठंडी हवा और मच्छर भी आते हैं। जिनसे रातभर सोना भी दुभर हो जाता है। मरीज अपने घर से ही कंबल लेकर आते हैं। रोजाना बेड की चादर तक नहीं बदली जा रही है।
-मितू बामला, निवासी
जिला नागरिक अस्पताल परिसर में नवीनीकरण का काम अभी चल रहा है। भवन की रिपेयरिंग के अलावा नवीनीकरण के दौरान टूटी खिड़कियों को भी दुरुस्त किया जाना है। अभी काम चल ही रहा है। इस दौरान कुछ कहना ठीक नहीं है। अस्पताल के स्टोर में कंबल व अन्य सामान की स्थिति के बारे में संबंधित स्टाफ से रिपोर्ट ली जाएगी और सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कराएंगे। -डॉ. राज दिसोदिया, प्रधान चिकित्सा अधिकारी जिला नागरिक अस्पताल भिवानी।
जिला नागरिक अस्पताल में टूटे खिड़कियों के शीशे।