भिवानी। सैनिक से राजनेता बने पूर्व सांसद चौधरी जंगबीर सिंह (85) का शुक्रवार को लंबी बीमारी के चलते गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। कमल प्रधान ने बताया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार शनिवार को सुबह 11 बजे तोशाम जूई रोड स्थित चौधरी रघुबीर सिंह फार्म हाउस पर पेट्रोल पंप के पास किया जाएगा।
चौधरी जंगबीर सिंह का जन्म एक मार्च 1941 को तोशाम हलके के गांव खरकड़ी (माखवान) में हुआ था। उन्होंने एमए व एलएलबी तक शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद फौज में भर्ती हुए। राज राइफल्स में रहते हुए 1962 में चीन और 1965 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में अग्रिम पंक्ति में रहकर दुश्मनों के उन्होंने छक्के छुड़ाए। इसके बाद वे राजनीति में आए। आपातकाल के दौरान वर्ष 1975 से 1977 तक हिसार जेल में रहे। जेल में करीब 19 माह 10 दिन तक हिसार जेल में रहे। उनके पिता चौधरी रघुबीर सिंह फौज में सूबेदार थे जिनसे प्रेरणा लेकर जंगबीर सिंह में देशसेवा का जज्बा पैदा हुआ।
पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के खिलाफ दो बार लड़ा था चुनाव
पूर्व सांसद चौधरी जंगबीर सिंह ने वर्ष 1967 में तोशाम से पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ा। इस चुनाव में वे महज 800 वोटों से हार गए। वर्ष 1968 में उन्होंने फिर तोशाम से ही चौधरी बंसीलाल के खिलाफ चुनाव लड़ा जिसमें हार-जीत का अंतर मामूली वोटों का रहा। वर्ष 1977 में उन्होंने स्व.चौधरी सुरेंद्र सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा जिसमें हार-जीत का फैसला करीब 1200 वोटों से हुआ। वर्ष 1991 में वे भिवानी से सांसद चुने गए। उन्होंने अपने धुर विरोधी चौधरी बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी से चुनाव लड़कर जीत हासिल की।
बनना चाहते थे वकील बन गए फौजी
जंगबीर सिंह ने अपने संस्मरण में बताया था कि वे दिल्ली एलएलबी करने गए थे। वकील बनने की तमन्ना पूरी नहीं हुई। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि वे सात वर्ष तक सेना में रहे। इसी दौरान चीन से युद्ध शुरू हो गया और वे फौज में भर्ती हो गए। वर्ष 1962 में चीन और 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में उन्होंने एक सिपाही के रूप में अग्रिम पंक्ति में रहकर देश की रक्षा की। उनके पिता चौधरी रघुबीर सिंह भी फौज में सूबेदार थे जिनसे उन्हें प्रेरणा मिली।
पेड़-पौधों से था बेहद लगाव
पूर्व सांसद चौधरी जंगबीर सिंह को पेड़-पौधों से विशेष लगाव था। किसान परिवार से संबंध होने के कारण यह लगाव बचपन से ही था जो बाद में जुनून में बदल गया। राजनीतिक जीवन से दूरी बनाने के बाद उन्होंने बागवानी में विशेष रुचि ली। वे कहा करते थे कि पौधों को जितना प्यार देंगे वे बदले में कई गुना लौटाते हैं। उनके घर में फलदार, फूलदार और आयुर्वेदिक पौधों की भरमार थी जहां 150 से अधिक पौधे लगाए गए थे।
कमेरे वर्ग के हितों की आवाज उठाई
किसान और कमेरे वर्ग के हितों की आवाज को लेकर जीवनभर संघर्ष करने वाले, जिनका मुझ पर सदैव स्नेह और आशीर्वाद रहा। मेरे पारिवारिक घनिष्ठ मित्र कमल प्रधान के पिता पूर्व सांसद जंगबीर सिंह के निधन की सूचना मेरे लिए पारिवारिक क्षति है। कुलदीप बिश्नोई, पूर्व सांसद