गांव दिनोद में स्थित राधास्वामी सत्संग लोगों को प्रवचन सुनाते संत कंवर महाराज।
भिवानी। संतों का प्रथम ध्येय समाज का कल्याण है। संत परमात्मा का ही स्वरूप हैं। परमात्मा की भांति संत भी किसी से भेदभाव नहीं करते। संत का अर्थ सत्य है और सत्य कभी बदलता नहीं। गांव दिनोद में स्थित राधास्वामी सत्संग के मुख्यालय में संत कंवर महाराज ने साध संगत के समक्ष यह वचन फरमाया।
संत कंवर महाराज ने कहा कि अपनी शिक्षा और दीक्षा अच्छी रखो। शिक्षा सभ्यता, आदर्शों से और दीक्षा आपको परमात्मा से रूबरू कराती है। इसलिए शिक्षा अच्छे गुरु से लो और दीक्षा सच्चे सतगुरु से लो।
उन्होंने कहा कि हर पल चेतो और समय की कद्र करो। कंवर महाराज ने फरमाया कि कर्म बिगाड़ना और सुधारना इंसान के अपने हाथ में है। आपके किये कर्म का दोष आप किसी दूसरे पर नहीं मढ़ सकते। परमात्मा की नजर से कोई नहीं बच सकता। वो सबका लेखा रखता है।
उन्होंने कहा कि प्रारब्ध कर्म के कारण आपको यह जन्म मिला। इंसानी शरीर मिला। अच्छा घर, कुल मिला। इसका सदुपयोग करो। कंवर महाराज ने कहा कि संत इस दुनिया के समस्त पदार्थों को ही दुखों का असली कारण मानते हैं जबकि हम इसमें सुख खोजते हैं जबकि सच्चा सुख परमात्मा के नाम में ही छिपा है। नाम मिलता है सेवा से और सेवा शुरू होती है घर से। सेवा आपके जगत को बनाती है। आप मुक्ति की नहीं भक्ति की चाह रखो।
उन्होंने फरमाया कि दुनियादारी में रहकर आप भक्ति कमाओ। पर धन और पर त्रिया से नेह न लगाओ। हक की कमाई खाओ। किसी का दिल न दुखाओ। स्वयं की निरख-परख करते रहो।