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Bhiwani News: सरकारी स्कूलों में नियमों से खिलवाड़, मिड-डे-मील के चूल्हे में झोंक रहे कबाड़

Mon, 11 Sep 2023 10:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। सरकारी स्कूलों में नियमों से खिलवाड़ कर मिड डे मील के चूल्हे में ईंधन के तौर पर खराब पड़े ड्यूल डेस्क और कबाड़ झोंक बच्चों के लिए खाना पक रहा है। शहर के मॉडल संस्कृति राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में मिड-डे-मील की व्यवस्था धुआं-धुआं हो रही है। वहीं गैस सिलिंडर को स्टोर में रखकर ताला लगा दिया है।
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यहां पीपल की लकड़ी तक को चूल्हे में जला रहे हैं, जबकि इस लकड़ी को घर या किसी संस्थान में जलाना अशुभ माना जाता है। अचरज की बात तो यह भी है कि इस धुएं से बच्चों का दम भी कक्षा कक्ष में बैठे-बैठे घुटता है। नियम के अनुसार प्रत्येक सरकारी स्कूल में मिड डे मील के मध्याह्न भोजन को पकाने के लिए अलग से कुकिंग कोस्ट जारी की जा रही है, मगर यह राशि कौन डकार रहा है, इसका भी कुछ नहीं पता। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी भी खाना पकाने के हालात से अनजान हैं।

भिवानी जिले में 743 सरकारी स्कूल हैं। इनमें 449 प्राइमरी और 294 अपर प्राइमरी स्कूल शामिल हैं, जिनके अंदर पढ़ाई करने वाले करीब 60 हजार बच्चों के लिए रोजाना ही मिड डे मील का मध्याह्न भोजन भी पक रहा है। मिड डे मील पकाने के लिए स्कूल में बच्चों की संख्या के हिसाब से विभाग ने कुकों की नियुक्ति भी की हैं। इन कुकों को बर्तन, गैस चूल्हा और सामान उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक स्कूल में एक टीचर को मिड डे मील इंचार्ज भी नियुक्त किया है।
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पड़ताल के तहत शहर के सेठ किरोड़ीमल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की मिडिल विंग तक के बच्चों को मिड डे मील परोसे जाने का हाल देखा तो यहां व्यवस्था धुआं-धुआं नजर आई। जहां पर मिड डे मील पक रहा है वहां पर रसोई के नाम पर सिर्फ एक छोटा सा शेड लगा रखा है। जहां पर आसपास स्कूल के कबाड़ में टूटे हुए ड्यूल डेस्क पड़े हैं और इन्हीं के बीच पीपल के पेड़ की टूटी टहनियां ईंधन में इस्तेमाल के लिए रखी हैं। सुबह रोजाना खाना पकाने के लिए कुकों को यहां घना धुआं झेलना पड़ता है। जब उनसे पूछा कि गैस सिलिंडर इस्तेमाल क्यों नहीं करते तो उनका जवाब था कि दो गैस सिलिंडर भी है और बड़ा चूल्हा भी। लेकिन काफी अर्से से उसे स्टोर के अंदर ताले में बंद कर रखा है। रोजाना खाना पकाने के लिए सुबह आठ बजे चूल्हा जलाना पड़ता है, करीब तीन से साढे तीन घंटों में खाना तैयार होता है। चूल्हे में आंच कम धुआं ज्यादा रहता है। कई बार तो सूखी लकड़ी तक नहीं मिलती। बाहर से भी ईंधन नहीं खरीदा जा रहा है। संवाद
अधिकांश सरकारी स्कूलों में कुकों से मिड डे मील का भोजन चूल्हे पर तैयार कराया जा रहा है। जबकि प्रत्येक स्कूल को कुकिंग कोस्ट की राशि मिलती है। कुक इसका विरोध नहीं कर सकती, क्योंकि उन्हें नौकरी से हटाने का डर दिखाया जाता है। मिड डे मील के काम के अलावा कुकों से स्कूल की सफाई और घास तक कटाई जाती है, क्योंकि अधिकांश स्कूलों में चपरासी तक नहीं है। उन्हें सुबह आठ बजे बुलाकर दोपहर दो बजे बाद घर भेजा जाता है। वेतन के नाम पर सात हजार मिलते हैं, उसके लिए भी कभी चार तो कभी सात माह इंतजार करना पड़ता है। अधिकारियों को भी सब पता है, मगर कोई अधिकारी स्कूल में दिखावे के लिए निरीक्षण करते हैं, उनके जाते ही सब पहले जैसा चलता रहता है।

-सुदेश देवी, जिला प्रधान, मिड डे मील वर्कर्स यूनियन भिवानी।
जिले के प्रत्येक सरकारी स्कूल में कुकिंग कोस्ट के तहत गैस सिलिंडर रिफिलिंग के आदेश हैं। चूल्हे पर मिड डे मील पकाना गलत हैं, इसकी विभाग अनुमति नहीं देता है। मैंने मॉडल संस्कृति विद्यालय में भी चूल्हे पर भोजन पकाने पर संज्ञान लिया है। वहां पता चला कि अभी नई विंग बनी हैं, जल्द यहां व्यवस्था कराई जाएगी। सभी स्कूल मुखियाओं और एमएमडीएम इंचार्जों को सख्त हिदायतें हैं कि गैस चूल्हे पर ही मध्याह्न भोजन पकाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं और साफ सफाई का खास ध्यान रखें, कोई कोताही मिलती है तो कार्रवाई होगी।
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-संतोष नागर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी भिवानी।
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