असम निवासी बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म और छेड़छाड़ मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और हरियाणा बाल संरक्षण आयोग ने अपनी रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में बाल कल्याण समिति भिवानी की महिला सदस्य प्रियंका धूपड़, जिला बाल कल्याण अधिकारी नरेंद्र और मनोज एलपीओ को निलंबित करने की सिफारिश की है। इसके अलावा इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी सिफारिश राष्ट्रीय आयोग ने की है। वहीं दूसरी ओर अब इस मामले की सुनवाई पोक्सो कोर्ट में स्थानांतरित कर दी गई है। शुक्रवार को काउंसिलर हरिकिशन की जमानत याचिका पर सुनाई हुई जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है।
असम निवासी एक नाबालिग बच्ची को खरीद की चरखी दादरी लाया गया। वहां पर बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। मामला उजागर होने पर सीडब्ल्यूसी चरखी दादरी ने बच्ची को भिवानी बाल आश्रम में भेज दिया। बाल आश्रम में काउंसिलर हरिकिशन ने काउंसिलिंग के दौरान बच्ची के साथ छेड़छाड़ की। हरिकिशन के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हो गया। इसके बाद सीडब्ल्यूसी भिवानी की महिला सदस्य प्रियंका धूपड़ और एलपीओ मनोज ने तत्कालीन महिला थाना प्रभारी से मिलीभगत कर बच्ची की अवैध रूप से काउंसिलिंग की और उस पर हरिकिशन के खिलाफ दी गई शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। यह दबाव बार-बार बनाया गया और जबरदस्ती कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करवाए गए थे।
बाल कल्याण समिति की महिला सदस्य प्रियंका धूपड़ भाजपा भिवानी जिला अध्यक्ष शंकर धूपड़ की बेटी हैं। वहीं इस मामले में पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक किरण चौधरी भी ट्वीट कर भाजपा को निशाने पर ले चुकी हैं। वहीं कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रियंका के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा था।
राष्ट्रीय और हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपनी जांच में सीडब्ल्यूसी सदस्य प्रियंका धूपड़, डीसीपीओ नरेंद्र कुमार और मनोज एलपीओ को मामले में हेरफेर करने, झूठे सुबूत बनाने और नाबालिग पीड़िता पर बयान बदलने के लिए दबाव बनाने का दोषी पाया। इसके लिए आयोग ने लंबित प्रशासनिक जांच की अवधि के दौरान उन्हें एक सप्ताह के भीतर तत्काल निलंबित करने और बाद में कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंसा की।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भिवानी बाल आश्रम में लगाए गए सीसीटीवी की फुटेज भी पुलिस को सौंपी जाए। इससे मामले में तारीखों और तथ्यों का मिलान हो सकेगा। वहीं दूसरी ओर प्रियंका धूपड़ को सीडब्ल्यूसी की मेंबर होने के बावजूद स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने इस मामले को बहुत अधिक गंभीर मानते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग से मामले में एक स्वतंत्र प्रशासनिक जांच करने की सिफारिश की है। कहा है कि यहां यह पता लगाया जाना चाहिए कि क्या बाल आश्रम भिवानी की किसी अन्य लड़की के साथ भी कभी इसी तरह के दुर्व्यवहार किया गया है।
राष्ट्रीय एवं बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट में भिवानी के उपायुक्त को भी सुझाव दिया है कि उनको जेजे अधिनियम 2015 की धारा 27 (8) के अनुसार सीडब्ल्यूसी के कामकाज की तिमाही समीक्षा करनी चाहिए ताकि ऐसे मामले की पुनरावृत्ति न हो सके।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपनी रिपोर्ट जारी कर दी है। सीडब्ल्यूसी सदस्य प्रियंका धूपड़, डीसीपीओ नरेंद्र और मनोज एलपीओ को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने की अनुशंसा की गई है। इसके अलावा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए भी लिखा है। इस रिपोर्ट के बारे में सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र भेज दिया गया है। - ज्योति बैंदा, अध्यक्ष, हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग
राष्ट्रीय और प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट राहत भरी है। मगर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं का संरक्षण प्राप्त होने के कारण आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी है। आरोपियों के खिलाफ जो सबूत हैं, वे कार्रवाई के लिए पर्याप्त हैं। प्रशासन को यह मामला गंभीरता के साथ लेना चाहिए। - सुशील वर्मा, पूर्व सदस्य, बाल अधिकारी संरक्षण आयोग