विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट कटने के बाद राज्यमंत्री बिशंबर वाल्मीकि और पूर्व विधायक शशिरंजन परमार ने बागी रुख अख्तियार कर लिया है। इस बीच रूठों को मनाने के लिए भाजपा आलाकमान सक्रिय हो गया है। भाजपा आलाकमान के समक्ष राज्यमंत्री और परमार ने भी अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
बवानीखेड़ा से लगातार दो बार विधायक रह चुके बिशंबर वाल्मीकि प्रदेश में राज्यमंत्री भी हैं, लेकिन इस बार उन्हें चुनाव में भाजपा ने टिकट नहीं दिया। इसी को लेकर उनके पैतृक गांव खरक में भी पंचायत हुई। इसमें ग्रामीणों ने उनके नाम का विरोध कर डाला और भाजपा के टिकट वितरण के निर्णय को सही बताया। वहीं, तोशाम से पिछले विधानसभा चुनाव में किरण चौधरी की टक्कर में चुनाव लड़ते हुए 56 हजार वोट लेने वाले पूर्व विधायक शशिरंजन परमार को भी तोशाम से टिकट नहीं मिलने का मलाल है।
शशिरंजन परमार के आवास पर शुक्रवार को कार्यकर्ताओं और समर्थकों की बैठक भी बुलाई गई थी। इसमें यह निर्णय हुआ था कि आठ सितंबर को कैरू के बाबा मुंगीपा मंदिर में पंचायत बुलाई है, जिसमें वे आगे का फैसला लेंगे।
तोशाम और बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों में इस बार टिकट वितरण में भाजपा ने पुराने चेहरों के बजाय नए चेहरों पर विश्वास जता चुनावी मैदान में उतारा है। हालांकि नए चेहरे मैदान में आने के बाद दिग्गज नेताओं के सुर भी खुद की पार्टी में ही बदल गए हैं। ऐसे में अब पार्टी के आलाकमान नेता भी उनकी मान मनोव्वल में जुटे हैं। दिल्ली में चल रही आलाकमान की मंथन बैठक में क्या नतीजा निकलेगा और इनको उसमें क्या आश्वासन मिलेगा यह भी भविष्य की राजनीति तय करेगा।