भिवानी के आजादनगर में बना 200 साल पुराना मंदिर।
भिवानी। नगर परिषद में करोड़ों के भूमि घोटाले की जांच अभी ठंडी भी नहीं पड़ी है कि भिवानी के आजादनगर में एक धर्मार्थ ट्रस्ट की करीब 200 साल पुरानी ऐतिहासिक संपत्ति को बेचने की कोशिश का आरोप लगा है। कोलकाता में बैठे ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने धर्मार्थ ट्रस्ट की 9 कनाल 9 मरला भूमि में बने प्राचीन शिव मंदिर, दो गुंबद बने ऐतिहासिक कुओं के साथ प्राचीन समाध का सौदा तय कर दिया है। राजस्व रिकाॅर्ड में ये प्राचीन धरोहर धर्मार्थ ट्रस्ट के नाम से दर्ज है।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार के समक्ष आजाद नगर कॉलोनी के लोगों ने लिखित शिकायत देकर धर्मार्थ ट्रस्ट की ऐतिहासिक धरोहर को बेचने की साजिश करने वालों पर कार्रवाई कराने व मदद की गुहार लगाई। इस पर संगठन अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने संज्ञान लेते हुए इस मामले में मिलीभगत करने वाले जिला राजस्व विभाग अधिकारियों और ट्रस्ट की संपत्ति बेचने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए कदम उठाया है।
बृजपाल सिंह ने बताया कि आजाद नगर में एक धर्मार्थ ट्रस्ट की करीब 15 करोड़ से अधिक की 200 साल पुरानी ऐतिहासिक संपत्ति है, जिसमें भिवानी का पुराना इतिहास भी झलक रहा है। इस संपत्ति को कोलकाता में बैठे तथाकथित कुछ पदाधिकारियों ने साजिश के तहत इस संपत्ति को एक महिला को बेचने का प्रलेख तैयार कराकर सब रजिस्ट्रार कार्यालय भिवानी में जमा करा दिया है। इसमें इस संपत्ति को 2 करोड़ 25 लाख रुपये में बेचा गया है।
इसमें 11 लाख 25 हजार रुपये का स्टॉप ड्यूटी का भुगतान भी किया गया है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों में स्पष्ट है कि सार्वजनिक भूमि को बेचा व खरीदा नहीं जा सकता है। इसकी मालिक शहर में नगर परिषद और गांव में ग्राम पंचायत होती है। वहीं इस मामले में भिवानी सब रजिस्ट्रार कार्यालय के नायब तहसीलदार अंकित से फोन पर काफी बार संपर्क किया, उनसे बात नहीं हो पाई।
मेरे संज्ञान में अभी तक ऐसा कोई मामला नहीं आया है। अगर ऐसी कोई भूमि की बिक्री को लेकर मामला हुआ है तो तहसीलदार से सोमवार को तलब कर इस संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी। कानूनी दायरे में ही कोई काम किया जाएगा। कानून व नियम से बाहर कोई काम नहीं किया जाएगा।
-महावीर कौशिक, उपायुक्त, भिवानी।