किरण चौधरी के निवास स्थान पर लगा कांग्रेस का झंडा उतारते कार्यकर्ता।
भिवानी। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा दूसरे दलों के असंतुष्ट और जनाधार वाले नेताओं को अपनी ओर खिंचने में लगी है। किरण चौधरी और श्रुति के भाजपा में शामिल होने के बाद चौधरी बंसीलाल के गढ़ रहे भिवानी, महेंद्रगढ़ और चरखी दादरी में भाजपा को मजबूती मिली है लेकिन इस सियासी बदलाव ने विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस में कई उलटफेर की संभावना को प्रबल कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल की विरासत की राजनीति में भिवानी जिला उनका गढ़ माना जाता है। तोशाम से विधायक किरण चौधरी के उलटफेर के बाद भाजपा खेमे में भी खलबली से कांग्रेस को भी अब आपदा में अवसर नजर आ रहा है। कांग्रेस की नजर अब भाजपा के बागी नेताओं पर है, जो किरण के आने के बाद अपने सियासी जमीन को लेकर आशंकित हैं। यहां बात करें विधानसभा चुनावों की तैयारियों की तो कई नेता पिछले पांच साल से यहां अपने राजनीतिक कॅरिअर के लिए जमीन तैयार करने में जुटे हैं जिन्हें चुनावी परीक्षा में नतीजों का ही इंतजार है।
विधानसभा चुनावों से पहले अब भिवानी जिले में भी राजनीतिक समीकरण बदले हैं तो इसका असर नेताओं के कॅरिअर पर भी पड़ेगा। किरण खुद तोशाम से विधायक हैं, ऐसे में इस सीट से चुनावी तैयारी में जुटे भाजपाइयों में अंदर ही अंदर खलबली की स्थिति है। वैसे टिकट को लेकर राजनीतिक दलों ने ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं, जो अब प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर नेताओं की नब्ज और जनता का मन टटोल रहे हैं। ये अपनी रिपोर्ट आला कमान को देंगे। टिकट वितरण में कौन कितना आगे और कौन पीछे रहेगा, इससे भी उलटफेर की संभावना बनेगी। हालांकि अभी चुनाव में थोड़ा समय बचा है, मगर राजनीतिक माहौल को देखते हुए पाला बदलने का दौर अभी से शुरू हो गया है। संवाद
प्रत्येक विधानसभा में है एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति
भिवानी जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो यहां एक अनार सौ बीमार वाली कहावत सटीक बैठती है, क्योंकि विधानसभा के टिकट के लिए यहां अनेक ऐसे नेता हैं जो खुद की दावेदारी प्रबल मानकर चल रहे हैं। अब विधानसभा में इनका टिकट कटा तो ये नेता पाला और आस्था बदलते देर नहीं लगाएंगे। हालांकि ये काफी लंबे अर्से से इलाके में भागदौड़ भी कर रहे हैं। खुद की पार्टी के अंदर ही नेताओं के बगावती तेवरों का नेताओं को सामना भी करना पड़ेगा।
किरण खुद के अलावा बेटी को भी करेगी पार्टी में एडजेस्ट
भाजपा में जाने के बाद किरण समर्थकों का मानना है कि किरण अपनी बेटी को भी एडजेस्ट कर सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है। ऐसा हुआ तो विधानसभा चुनावों में किरण के बजाय श्रुति मैदान में उतर सकती हैं। वैसे भी, राज्यसभा में करीब दो साल से अधिक का कार्यकाल बचा है।