बवानीखेड़ा। कस्बे में प्रस्तावित महर्षि वाल्मीकि स्टेडियम और रेलवे लाइन के पास स्थित दादी गोरी मिनी स्टेडियम मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उपेक्षित पड़े हैं। दोनों ही खेल मैदानों में न तो चहारदीवारी पूरी है न पर्याप्त खेल उपकरण और न ही प्रशिक्षित कोच की व्यवस्था।
करीब 30 हजार आबादी वाले इस कस्बे में सैकड़ों बच्चे रोजाना विभिन्न खेलों का अभ्यास करते हैं लेकिन वे अपने स्तर पर ही संसाधनों के अभाव में तैयारी करने को मजबूर हैं। संजय अनिल, पवन, अशोक, पुष्पा, अजीत, मंजु रामकिशन, मानसिंह, श्याम, दीपक, मुकेश का कहना है कि यदि बेहतर कोचिंग, उपकरण और सुव्यवस्थित मैदान उपलब्ध कराए जाएं तो क्षेत्र के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर सकते हैं।
स्थानीय खिलाड़ियों के अनुसार दादी गोरी स्टेडियम से जुड़े खिलाड़ियों ने हाल ही में जयपुर में हुई तीरंदाजी प्रतियोगिता में पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इसके बावजूद सुविधाओं की कमी बनी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग दस वर्ष पूर्व स्टेडियम की नींव रखी गई थी लेकिन निर्माण कार्य अधूरा है।
रनिंग ट्रैक खिलाड़ियों ने स्वयं तैयार किया है जबकि एथलेटिक्स, आर्चरी, वॉलीबॉल और बॉक्सिंग जैसे खेलों की तैयारी भी सीमित संसाधनों में हो रही है। स्टेडियम की चहारदीवारी कई स्थानों से क्षतिग्रस्त है, अवैध कब्जे बढ़ रहे हैं और ईंट चोरी की घटनाओं से दीवारें टूट चुकी हैं। आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है और मैदान से गुजरने वाले वाहनों से ट्रैक भी खराब हो रहा है।