भिवानी। पुलिस टीम पर हमले के एक फर्जी मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी हनुमान गेट निवासी पूर्व पार्षद हंसराज उर्फ हंसा को बरी कर दिया है। अदालत ने एसएचओ, दो एएसआई और दो हेड कांस्टेबल को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ दस दिन में केस दर्ज करने के आदेश दिए। अदालत ने सीजेएम को पूरे मामले की देखरेख करने और मानवाधिकार आयोग को भी सूचना देने के आदेश दिए हैं।अदालत ने सभी पांच पुलिस कर्मचारियों पर कुल 15 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।
पीड़ित पक्ष के वकील सज्जन खनगवाल ने बताया कि होली के दिन 20 मार्च 2019 को हंसराज हंसा पर पुलिस कर्मचारियों ने गोली चलाई थी। गोली उसकी जांघ में लगी थी। पुलिस कर्मचारियों ने उसे बेरहमी से पीटा था। फिर हंसा के खिलाफ ही पुलिस टीम पर जानलेवा हमला कर हत्या के प्रयास के मामले में फर्जी केस दर्ज करा दिया था। अधिवक्ता सज्जन खनगवाल ने बताया कि हंसा को फर्जी तौर पर पुलिस टीम पर हमला करने और षडयंत्र के तहत फंसाया गया था। न्यायालय ने प्रस्तुत किए गए तथ्यों और गवाहों के बिनाह पर आरोपी हंसराज उर्फ हंसा को बरी कर दिया है और पांच पुलिसकर्मियों को दोषी माना है। अदालत ने यह फैसला 27 फरवरी को सुनाया था। सोमवार को न्यायालय ने ऑनलाइन ऑर्डर अपलोड कर दिया। फैसला सुनाए जाने के दस दिन के अंदर ही पुलिस को इन पांच कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने के भी आदेश दिए हैं, जिसकी जानकारी सीजेएम को देनी होगी।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार की अदालत ने एसएचओ अनिल पर तीन लाख रुपये, एएसआई दशरथ पर पांच लाख रुपये, एएसआई गिरिराज पर पांच लाख, हेड कांस्टेबल (एचसी) सनील और एचसी सुनील पर एक-एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने एसपी के साथ हर माह बैठक में भी इस मामले की प्रगति रिपोर्ट रखने के आदेश दिए हैं। ये जुर्माना राशि राज्य सरकार को उक्त कर्मचारियों के वेतन से काटकर पीड़ित को देनी होगी।
30 मार्च 2019 को किया था हंसा गिरफ्तार
एडवोकेट सज्जन खनगवाल ने बताया कि हंसा के खिलाफ पुलिस ने 20 मार्च 2019 को पुलिस कर्मचारियों पर हत्या के प्रयास के मामले में केस दर्ज किया था। उसे जांघ में गोली लगने की वजह से अस्पताल में दाखिल रहना पड़ा। फिर 30 मार्च 2019 को हंसा को गिरफ्तार कर पुलिस ने न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था। इसके बाद 24 अगस्त 2021 को न्यायालय से बेल कराने के बाद ही वह बाहर आया था।