फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhiwani News: अब थैलेसीमिया और हिमोफीलिया का होगा अलग से वार्ड

Fri, 31 May 2024 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल में ​स्थित डे केयर सैंटर।
विज्ञापन
भिवानी। थैलेसीमिया और हिमोफिलिया से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए अब जिला नागरिक अस्पताल में स्पेशल वार्ड बनाया जा रहा है। इसमें उनके इलाज के लिए बेड, खेलने के लिए खिलौने, म्यूजिक सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। जिले में थैलेसीमिया और हिमोफीलिया के काफी मरीज हैं। जिनको ध्यान रखते हुए सरकार ने नागरिक अस्पताल के डे-केयर सेंटर में थैलेसीमिया और हिमोफीलिया से पीड़ित मरीजों के लिए वार्ड बनाया जा रहा है।
विज्ञापन

सरकार की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में ये वार्ड बनाए जा रहे हैं। इसमें भिवानी के अस्पताल में जून माह के पहले सप्ताह में यह वार्ड बनकर तैयार हो जाएगा। डॉ. बबली गोयल ने बताया कि यह वार्ड जून के पहले सप्ताह में तैयार करना है। इसका उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री जून के दूसरे सप्ताह में करेंगे। वार्ड बनने के बाद थैलेसीमिया और हिमोफीलिया के मरीज को कही और जाने की जरूरत नहीं होगी। मरीज को बेड पर ही सारी सुविधा दी जाएगी। वार्ड में चार से पांच बेड होंगे।
चिकित्सक ने बताया कि थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है। इसमें मरीज को हर तीन महीने में या 6 महीने में ब्लड की बहुत ज्यादा आवश्यकता होती है। अगर ऐसे मरीजों को ब्लड समय पर नहीं चढ़ाया जाता तो उनकी जान पर बन सकती है। थैलेसीमिया की जांच सरकार द्वारा बिल्कुल फ्री होती है। थैलेसीमिया खून से जूडी एक गंभीर बीमारी है। इसमें व्यक्ति के शरीर में हीमोग्लोबिन बनना बंद हो जाता है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चों तक पहुंचती है। इसकी वजह से बहुत सारे रेड ब्लड सेल्स खत्म होने लगते है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में एनीमिया, पीली त्वचा, अधिक थकान, सांस लेने में कठिनाई, अनियमित दिल की धड़कन हाई बीपी आदि शामिल है।
विज्ञापन

हिमोफीलिया में किसी भी व्यक्ति को चोट लगने पर घाव हो जाता है। अगर घाव से खून बंद नहीं हो रहा तो उस व्यक्ति को हिमोफिलिया के लक्षण हो सकते है। हिमोफिलिया रोग में रक्त के थक्के बनने की क्षमता गंभीर रूप से कम हो जाती है। इस कारण हिमोफिलिया से पीड़ित व्यक्ति को मामूली चोट में अधिक खून बहने लगता है। हिमोफिलिया रोग आमतौर पर जीन में उत्परिवर्तन या परिवर्तन के कारण होता है। जो रक्त का थक्का बनाने के लिए आवश्यक क्लॉटिंग फैक्टर प्रोटीन बनाने के लिए निर्देश प्रदान करता है।
हिमोफिलिया रोग सामान्य तौर पर दो प्रकार का होता है नंबर एक हिमोफीलिया ए और हिमोफीलिया बी। हिमोफिलिया बी का सामान्य प्रकार है कि इसमें रोगी के रक्त में थक्के बनने के लिए आवश्यक फैक्टर-8 की कमी हो जाती है। इसके बीमारी के इलाज के लिए टीके लगाएं जाते है जिन्हें फेक्टर बोलते है। सरकारी अस्पतालों में टीके मुफ्त में लगाए जाते है। अगर किसी को भी हिमोफीलिया के लक्षण लगे तो तुरंत सरकारी अस्पताल में जाकर चिकित्सक से संपर्क करें और अपना इलाज मुफ्त में करवाएं।
जिले में मरीजों की संख्या
थैलेसीमिया - 58
हिमोफीलिया - 36
अस्पताल के डे केयर सेंटर पर थैलेसीमिया और हिमोफीलिया से पीड़ित मरीजों के लिए स्पेशल वार्ड बनाया जा रहा है। इसका उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री कमल गुप्ता करेंगे। वार्ड में मरीज को सारी सुविधा बेड पर ही दी जाएगी। अस्पताल में थैलेसीमिया और हिमोफीलिया के मरीजों के लिए सारी सुविधाएं मुफ्त हैं। यह वार्ड हरियाणा के सभी जिलों में बनाएं जा रहे है।
विज्ञापन

-डाॅ. दशरथ राव, कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल भिवानी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें