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स्टेडियम में एक ईंट भी नहीं रखी, खर्च हो गए 85 लाख

Sat, 17 Jan 2015 12:31 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, भिवानी
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खिलाड़ियों को खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर नगर परिषद में लाखों रुपये के हेरफेर का मामला उजागर हुआ है। बिना कोई निर्माण कराए ही खेल मद में मिले 85 लाख रुपये खर्च कर दिए गए हैं। सत्ता के प्रभाव में दो साल तक यह मामला परिषद में ही दबा रहा। सत्ता परिवर्तन के बाद खेल विभाग ने यह राशि मांगी है तो नगर परिषद में हड़कंप मच गया है।
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जिले के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में नगर परिषद को 85 लाख रुपये खेल मद में प्रदान किए थे। इस राशि से भीम स्टेडियम में कुश्ती या कबड्डी का हॉल बनाया जाना था। शासन ने इस राशि से शीघ्र काम आरंभ कराते हुए निर्माण पूरा कराने को कहा था। काम के लिए धनराशि कम पड़ने पर दूसरी किश्त भी देने का वादा किया था। खेल मद में आई इस राशि को परिषद के अफसरों ने निकाल तो लिया, लेकिन इससे स्टेडियम में खेल के लिए एक ईंट भी नहीं रखी गई। 

जानकारी होने पर खेल विभाग ने एक-दो बार इस राशि को वापस लेने की कोशिश भी की, मगर परिषद में ऊंची रसूख वाले नेताओं के प्रभाव के कारण फूटी कौड़ी नहीं दी गई। मामला परिषद में ही दबा रह गया। अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद खेल विभाग ने फिर से इस राशि की डिमांड की है। परिषद को पत्र लिखकर खेल मद की राशि लौटाने या निर्माण कार्य कराने को कहा है। खेल विभाग का पत्र मिलने के बाद परिषद में हड़कंप की स्थिति है। लाखों रुपये का बिजली बिल और कर्मचारियों के महीनों का बकाया मानदेय देने में हाथ खड़े कर चुका परिषद एक और देनदारी कहां से चूकता करे, असमंजस में है।
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खेल मद की राशि से ठेकेदारों को भुगतान
सूत्रों की मानें तो खेल मद के लिए मिली राशि को परिषद के जिम्मेदारों ने ठेकेदारों में बांट दी। यह सारा खेल कमीशन के फेर में हुआ है। परिषद के पास बजट न होने के कारण ठेकेदारों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता। लिहाजा, उन्होंने अपने रसूख का लाभ लेते हुए खेल मद की राशि से भुगतान करा लिया। इसके बदले बकायदे मोटी राशि भी अदा की गई है। तब दलील दी गई थी कि बाद में बजट आने पर इसे एडजस्ट कर लिया जाएगा, लेकिन बजट आने के बाद भी खेल मद की राशि लौटाने की किसी ने सुध नहीं ली।

उधार के अखाड़ों में होती है प्रैक्टिस
एक तरफ सरकार खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए नई खेल नीति बना रही है तो दूसरी ओर भीम स्टेडियम में खिलाड़ियों के कुश्ती हॉल भी नहीं है। बताते हैं कि नगर परिषद को मिली राशि से कुश्ती हॉल का निर्माण होना था, मगर भ्रष्टाचार के कारण इस राशि का दुरुपयोग कर खिलाड़ियों का हक मार लिया गया है।
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