भिवानी। शहर की सड़कों पर करीब नौ सौ ऑटो ऐसे दौड़ रहे जिनका न कोई रजिस्ट्रेशन है और न ही जिला में चलाने की अनुमति। इनमें काफी ऐसे भी है, जिनकी आरसी रद हो चुकी है। इतना ही नहीं रोहतक, सोनीपत, झज्जर आदि अन्य जिलों में रजिस्टर्ड ऑटो भी यहां खूब दौड़ रहे है और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ रहे है। इससे आम आदमी ही नहीं स्वयं ऑटो चालक भी परेशान है। इतनी संख्या में बिना रजिस्ट्रेशन दौड़ रहे ऑटो ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रहे है। अगर पुलिस सख्ती से ऑटो चालकों की जांच करें तो 40 फीसदी तक ऑटो पर लगाम लग सकती है।
न रजिस्ट्रेशन, न फिटनेस सर्टिफिकेट न ही अन्य कागजात। इसके बावजूद करीब नौ सौ ऑटो शहर की सड़कों पर दौड़ रहे है। न केवल ट्रैफिक व्यवस्था बिगाड़ रहे है वहीं शहर के वातावरण में भी जहर घोल रहे है। शहर में सभी मुख्य सड़कों पर ये ऑटो राहगीरों के लिए परेशानी बने है। यहां पुलिस प्रशासन जानकर भी अनजान बना है। विभाग कार्यालय में फिलहाल 52 सौ ऑटो रजिस्टर्ड है। मगर इनमें से अधिकतर की आरसी रद हो चुकी है। अनेक ने फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं लिया। यानी सड़क पर चलने लायक नहीं है।
2005 से पहले के ऑटो की नहीं हो रही पासिंग
ऑटो के लिए 10 वर्ष की कंडीशन के चलते वर्ष 2005 से पहले के ऑटो की पासिंग ही नहीं की जा रही। पासिंग नहीं होने के चलते पहले के ऑटो चलने लायक नहीं है। मगर करीब तीन सौ ऐसे है जो पासिंग नहीं होने के बावजूद शहर की सड़कों पर दौड़ रहे है।
लगे रोक, यूनियन की मांग
बिना अनुमति दौड़ रहे ऑटो और हर रोज आ रहे नए ऑटो से स्वयं ऑटो चालक भी परेशान है। ऑटो यूनियन अधिकारी अनेक दफा मिलकर डीसी व अन्य अधिकारियों से नए ऑटो के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने और बिना अनुमति दौड़ रहे ऑटो चालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुकी है। रेहड़ी एवं ऑटो यूनियन प्रधान रामनिवास शर्मा ने बताया कि चार हजार रुपये बचाने के फेर में ऑटो चालक रजिस्ट्रेशन नहीं कराते। 60 फीसदी ऑटो का इंश्योरेंस नहीं है। छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में ऑटो के स्टेयरिंग थमाए हुए है। पुलिस सख्ती से निपटे तो इन पर कंट्रोल किया जा सकता है।
पांच किलोमीटर का दायरा, गांवों तक का करते है सफर
गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल के सामने, हांसी गेट पर अशोक रोड पर अनेक ऑटो ऐसे खड़े रहते हैं जो 14-15 या इससे भी अधिक छात्राओं को एक साथ बैठाकर आसपास के गांव देवसर, दिनोद, बापोड़ा, हालुवास आदि गांवों में ले जाते है। विद्यार्थियों को ही नहीं अन्य यात्रियों के लिए भी ऑटो ऐसे ही गांवों का सफर तय करते है जबकि इन्हें नगर परिषद के पांच किलोमीटर के दायरे में ही चलने की अनुमति होती है। अनेक ऑटो स्कूल वैन का भी काम कर रहे है।
ये हो रहे नुकसान
* शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बदहाल
* बेलगाम दौड़ते ऑटो से निकलने वाले धुएं से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है।
* विभाग को प्रति वर्ष हजारों का नुकसान
* यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़
* 60 फीसदी ऑटो का इंश्योरेंस नहीं
वर्जन:::::::
शहर में काफी ऐसे ऑटो है जो बिना रजिस्ट्रेशन और आरसी के चल रहे है। दूसरे जिलों के भी काफी है। विभाग और ट्रैफिक पुलिस इनकी जांच कर रही है। चुनाव के बाद इनकी गहनता से जांच की जाएगी।
बीर सिंह, आरटीओ
वर्जन::::::
सभी ऑटो चालकों को निर्देश दिए गए है कि 31 दिसंबर तक पुलिस लाइन में ट्रैफिक पुलिस थाना में अपने कागजात की जांच करवाये और यूनिक नंबर ले। रात को चलने वाले ऑटो के लिए अलग से नंबर दिए जा रहे है। एक फरवरी से इनकी जांच की जा रही और जिसके कागजात पूरे नहीं मिले, उन्हें इंपाउंड किया जाएगा।
देशराज जांगड़ा, एसएचओ, ट्रैफिक पुलिस थाना
वर्जन:::
पुलिस की लचर कार्यप्रणाली के कारण बिना रजिस्ट्रेशन, बिना पासिंग और यहां तक की दूसरे जिलों के ऑटो भी यहां चल रहे है। हमने इस बारे में अधिकारियों से बातचीत की थी मगर उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया। पुलिस कदम उठाए तो वे सहयोग को तैयार है।
राजेंद्र सोनी, प्रधान, ऑटो यूनियन