तोशाम। एसडीजेएम सुनील कुमार ने बताया कि वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत 14 मार्च को न्यायिक परिसर में आयोजित की जाएगी। हालसा के मेंबर सेक्रेटरी तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डीएलएसए भिवानी के चेयरमैन के निर्देशानुसार इस लोक अदालत में आपसी सहमति से अधिक से अधिक मामलों के निपटारे का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत एक स्वैच्छिक प्रक्रिया पर आधारित मंच है जिसमें विवाद का निर्णय कानूनी रूप से बाध्यकारी और अंतिम होता है। इसके निर्णय के विरुद्ध किसी भी अदालत में अपील की अनुमति नहीं होती। राष्ट्रीय लोक अदालत में मुकदमे दायर होने से पहले के मामलों और न्यायालयों में लंबित मामलों दोनों प्रकार के विवादों का निपटारा किया जाता है। इसमें दोनों पक्ष स्वेच्छा से लोक अदालत के माध्यम से विवाद सुलझाने के लिए सहमत होते हैं।
एसडीजेएम ने बताया कि लोक अदालत का निर्णय न्यायालय के आदेश की तरह लागू किया जा सकता है। एक बार निर्णय हो जाने के बाद उस पर कोई अपील नहीं की जा सकती। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की कोर्ट फीस नहीं ली जाती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत एक अनौपचारिक, लचीला और जन-केंद्रित मंच है, जो त्वरित एवं सरल न्याय प्रदान करता है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुलभ है और उपयोगकर्ता-अनुकूल व्यवस्था के माध्यम से शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करती है।