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Bhiwani News: फर्जी पीआईडी के फेर में उलझी नगर परिषद की व्यवस्था, 72 रजिस्ट्रियां उजागर

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भिवानी। फर्जी प्रॉपर्टी आईडी (पीआईडी) के फेर में नगर परिषद की व्यवस्था उलझकर रह गई है। अनधिकृत क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज होने के बाद हड़कंप मचा है। अब तक 72 भूमि रजिस्ट्री के मामले उजागर हो चुके हैं जबकि करीब 250 फर्जी पीआईडी बनाए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
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वहीं तहसील कार्यालय में भी फर्जी पीआईडी के आधार पर हुई भूमि रजिस्ट्री के मामलों की जांच चल रही है लेकिन अभी तक किसी पर कार्रवाई की आंच नहीं आई है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में ये मामले हुए, उनमें अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि कर्मचारी तबादला होकर अन्य जिलों में सेवाएं दे रहे हैं। नगर परिषद के अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। इस बारे में सामाजिक कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को ट्वीट कर शिकायत दर्ज कराई है।
भिवानी शहर के अधिकृत दायरे में करीब 85,000 प्रॉपर्टी आईडी बनाई जा चुकी हैं। इन आईडी में मालिक का नाम, संपत्ति का क्षेत्रफल और लोकेशन सहित अन्य संबंधित विवरण दर्ज होते हैं। आरोप है कि एनडीसी हरियाणा पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों में अनधिकृत क्षेत्र को अधिकृत दर्शाया जा रहा है। अधिकारी कार्यालय में बैठकर ही इन दस्तावेजों की तस्दीक कर आगे भेज देते हैं। इसके बाद एनडीसी जारी होते ही संबंधित व्यक्ति सब रजिस्ट्रार कार्यालय में भूमि रजिस्ट्री के लिए आवेदन कर देता है। ऐसे मामलों में भूमि की रजिस्ट्री भी कर दी जाती है, क्योंकि पोर्टल पर नगर परिषद की एनडीसी का कॉलम होता है, जिसमें फर्जी तरीके से प्राप्त एनडीसी नंबर दर्ज कर दिया जाता है। सामने आए 72 रजिस्ट्री मामलों में संबंधित रजिस्ट्री क्लर्कों की सूची भी सरकार द्वारा तैयार कराई गई थी।
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ये है प्रॉपर्टी आईडी बनवाने और संशोधन की प्रक्रिया
शहरी हद में संपत्ति की प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए एनडीसी हरियाणा पोर्टल पर किसी भी सीएससी से ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के साथ संबंधित दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं। इसके बाद आवेदन नगर परिषद की पीआईडी शाखा की मेकर टीम के पास पहुंचता है। मेकर टीम दस्तावेजों की जांच कर पुष्टि करती है। मेकर टीम में लिपिक स्तर के कर्मचारी शामिल होते हैं। इसके बाद आवेदन चेकर टीम के पास भेजा जाता है। चेकर टीम में नगर परिषद का अधिकारी शामिल होता है। उसकी पुष्टि और स्वीकृति के बाद संबंधित संपत्ति मालिक को ऑनलाइन एनडीसी जारी की जाती है।



सब रजिस्ट्रार कार्यालय में रिकॉर्ड के अनुसार ही संपत्ति की वसीका पंजीकृत की जाती है। अगर नगर परिषद की तरफ से एनडीसी जारी कर दी गई है जबकि राजस्व रिकॉर्ड में इस भूमि की वसीका प्रतिबंधित की गई है तो रजिस्ट्री नहीं की जाएगी। ऐसा कोई मामला संज्ञान में आया या फिर शिकायत आई तो कार्रवाई की जाएगी। -जयवीर तहसीलदार भिवानी तहसील।



मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और हरियाणा के मुख्यमंत्री को पीआईडी गड़बड़झाला की खबर ट्वीट कर शिकायत दर्ज कराई है। मैंने यह भी सवाल उठाया है कि इस धोखाधड़ी की भनक उच्चाधिकारियों को नहीं है। क्या जेई और क्लर्क ही मिलकर यह कारनामा कर सकते हैं। बिना उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आए 250 फर्जी पीआईडी बनना बड़ा खेल है। -सुशील वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व सदस्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग।



नगर परिषद कार्यालय भिवानी में प्रॉपर्टी आईडी के आवेदन और संशोधन के लिए मेकर और चेकर टीमें बनाई गई हैं। मेकर टीम में तीन कर्मचारी तैनात हैं जबकि चेकर टीम में एमई को जिम्मेदारी दी गई है। संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही और जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है। अगर किसी पीआईडी के संबंध में कोई शिकायत है तो उसकी जांच की जाएगी। -राजाराम, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद भिवानी।
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