भिवानी। मानसून की बारिश के बाद मौसम में नमी बढ़ी है। वहीं पानी का ठहराव भी खाली जगहों पर होने लगा है। ऐसे में मच्छर का लारवा भी पनप रहा है। डेंगू के डंक पर स्वास्थ्य विभाग की भी पैनी नजर है।
जिले में रेपिड रिस्पोंस टीमों के गठन के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी जनवरी से अब तक 593 लोगों के सैंपल जांच चुके हैं, जिनमें डेंगू संभावित एक भी मरीज अभी तक नहीं मिला है। वहीं मलेरिया जांच के लिए जिले भर में 12 हजार 934 लोगों की ब्लड स्लाइड तैयार कराई जा चुकी हैं। जिसमें अभी तक कोई भी संदिग्ध मरीज सामने नहीं आया है।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले भर में 30 रेपिड रिस्पोंस टीमों का गठन किया है। इनमें 29 टीमें ग्रामीण और एक टीम शहरी दायरे में सक्रिय है। ये टीम किसी भी हिस्से में कोई भी डेंगू या फिर मलेरिया और चिकनगुनिया का संदिग्ध मामला सामने आता है तो तुरंत हरकत में आ जाती है। इसके बाद उस इलाके की स्कैनिंग और विस्तृत रूप से घर-घर पहुंचकर प्रत्येक सदस्य की स्वास्थ्य जांच भी होती है। वहीं बीमारी की संभावनाओं को तलाश उनका निदान भी टीम तुरंत प्रभाव से कराती है।
स्वास्थ्य विभाग के फील्ड कर्मचारी अब तक 593 लोगों के डेंगू संभावित जांच के लिए सैंपल ले चुके हैं, जिनमें से एक भी संदिग्ध मरीज नहीं मिला है। जबकि पिछले साल डेंगू के 123 मामले सामने आ चुके थे। वहीं मलेरिया का एक मामला भी सामने आया था। जो धनाना से था। ग्रामीण इलाकों में जलभराव संभावित इलाकों में सबसे अधिक खतरा रहता है, क्योंकि यहां पनपने वाला मच्छर ही लोगों की सेहत पर डंक का असर छोड़ता है। हालांकि जलभराव वाले इलाकों में स्वास्थ्य विभाग पहले ही गंबुजिया मछली से मच्छर खत्म करने का प्लान तैयार कर चुका है।
शहरी दायरे में नगर परिषद फोगिंग कराने की भी कर रहा तैयारी
शहरी वार्डों में मच्छर का प्रकोप भी बारिश के बाद बढ़ने लगा है। ऐसे में नगर परिषद भी शहर के 31 वार्डों में फोगिंग कराने की तैयारियों में जुटा है। नगर परिषद के पास खुद की दो फोगिंग गन मशीन हैं। इनके जरिए गली मोहल्लों में कर्मचारी दुपहिया वाहन पर भी आसानी से फोगिंग कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग पहले ही फोगिंग की दवा मुहैया करा चुका है। पेट्रोल से चलने वाली इन मशीनों में एक दिन में दो से अधिक वार्ड फोगिंग के दायरे में लाए जा सकते हैं।
बारिश के बाद से ही मच्छर के पनपने की संभावनाएं अधिक रहती हैं, इसलिए स्वास्थ्य विभाग एक माह पहले से ही पुख्ता प्रबंध कर एंटी लारवा एक्टिविटी शुरू कर देता है। रेपिड रिस्पांस टीमों का गठन भी हो चुका है। संभावित इलाकों में मरीजों के सैंपल जांचे जा रहे हैं, जहां पर भी कोई संभावित मरीज सामने आता है। उसे नागरिक अस्पताल के स्पेशल वार्ड में उपचार दिलाया जाएगा। वहीं उसके इलाके में पहुंचकर भी स्वास्थ्य कर्मी जांच करेंगे।
- डॉ. कृष्ण कुमार, उप सिविल सर्जन, भिवानी।