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दूसरों को रोशनी देने वाला किशनलाल जालान अस्पताल खुद अंधियारे में डूबा

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किशनलाल जालान राजकीय नेत्र अस्पताल में लाइन में लगे मरीज। संवाद - फोटो : Bhiwani
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नवनीत शर्मा
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भिवानी। दूसरों की जिंदगी में फैले अंधेरे को मिटाकर रोशनी देने वाला किशनलाल राजकीय नेत्र अस्पताल अब खुद अंधियारे में डूबा हुआ है। अस्पताल प्रशासन चिकित्सक न होने की वजह से मरीजों का उपचार करने के लिए लाचार है। वीरवार को हमारी टीम ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की पड़ताल की तो वहां पर कई खामियां दिखीं।
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के चलते महज दो फार्मासिस्ट के कंधों पर रोजाना 500 से अधिक मरीजों की ओपीडी का भार रहता है। भले ही नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एडविन को नागरिक अस्पताल का प्रधान चिकित्सा अधिकारी नियुक्त कर दिया है, लेकिन किशनलाल राजकीय नेत्र अस्पताल में चिकित्सक न होने की वजह से वे रोजाना दोपहर तक यहां आकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
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अस्पताल प्रशासन की ओर से चिकित्सकों की नियुक्ति की मांग को लेकर कई दफा उच्च अधिकारियों को पत्र लिखे गए, मगर उन पत्रों की प्रक्रिया स्वरूप किसी चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो पाई। जिलेभर में ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर में किशनलाल राजकीय नेत्र अस्पताल ने विशेष छपा छोड़ी हुई थी। अस्पताल में अब भी हिसार, रोहतक, जींद, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, नारनौल के मरीज चेकअप के लिए आ रहे हैं। मगर चिकित्सकों की कमी की वजह से उन्हें उपचार नहीं मिल पा रहा। ऐसे में अधिकतर मरीज तीन से चार दिन का इंतजार करने के बाद बिना उपचार के ही लौट जाते हैं। वहीं अब महज 20 से 25 ही ऑपरेशन हो पा रहे हैं। (संवाद)
पीने को पानी न बैठने के लिए कुर्सियां
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के साथ ही मूलभूत सुविधाओं की भी कमी बनी हुई है। वीरवार को 500 से अधिक मरीजों की ओपीडी रही। इन मरीजों के बैठने के लिए कुर्सियों की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसकी वजह से उन्हें मजबूरी में नीचे फर्श पर ही बैठना पड़ा। साथ ही गर्मी के मौसम में भी अस्पताल में पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मरीज लगे लाइनों में, सीट से स्वास्थ्यकर्मी गायब
किशनलाल राजकीय नेत्र अस्पताल में वीरवारको उपचार करवाने के लिए सैकड़ों मरीज अस्पताल में लाइन में लगे हुए थे, लेकिन ओपीडी में काफी कक्षों की सीट से स्वास्थ्यकर्मी गायब मिले। मरीज करीब तीन घंटे से लाइन में लगे हुए थे और गर्मी की वजह से उनका बुरा हालत था। अस्पताल की ओपीडी में लेंस जांच केंद्र, औषधालय, लघु ऑपरेशन कक्ष से स्वास्थ्यकर्मी गायब रहे।
चिकित्सकों के आठ पद स्वीकृत, सभी रिक्त
अस्पताल में चिकित्सकों के कुल आठ पद स्वीकृत हैं और सभी रिक्त हैं। सीनियर मेडिकल ऑफिसर के लिए दो स्वीकृत पद हैं, जिनमें से दोनों पद रिक्त हैं। वहीं मेडिकल ऑफिसर के लिए चार पद स्वीकृत हैं, जोकि रिक्त हैं। वहीं नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मेडिकल ऑफिसर के दो पद स्वीकृत हैं, जोकि फिलहाल रिक्त हैं। इसके अलावा अस्पताल में दो फार्मासिस्ट और छह स्टाफ नर्स कार्यरत हैं। अस्पताल में चिकित्सकों के पद खाली होने की वजह से मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है।
मरीज बोले - बिना इलाज ही लौटना पड़ता है
तीन दिन से आंख का ऑपरेशन करवाने के लिए अस्पताल के चक्कर काट रही हूं। अब तक आंख का ऑपरेशन नहीं हुआ है। दो दिन पहले चिकित्सक के पास नंबर नहीं आया और अब भी तीन घंटे से लाइन में लगे हैं, पता नहीं कब तक चेकअप होगा। अस्पताल में बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं है। मजबूरी में नीचे फर्श पर बैठना पड़ रहा है।
- भरपाई देवी, निवासी रिवासा।
पिछले तीन दिन से रोजाना चार घंटे का सफर तय करके अस्पताल में आ रहे हैं। आंख से कुछ दिखाई नहीं देता। इसके लिए ऑपरेशन करवाना है। चिकित्सक ने दवा लेकर वापस भेज दिया। मगर कोई आराम नहीं हो रहा। फसल कटाई का काम छोड़ परिजनों के साथ अस्पताल में बैठ हैं और यहां उपचार नहीं मिल रहा।
15 दिन से आंखों का ऑपरेशन करवाने के लिए परिजनों के साथ अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। अस्पताल में चिकित्सक न होने की वजह से सिर्फ दवा देकर घर पर भेजे रहे हैं। आंखों की रोशनी कमजोर होने की वजह से ऑपरेशन करवाना आवश्यक है। 15 दिन में तीसरी बार अस्पताल में आए हैं, लेकिन ऑपरेशन कब होगा कुछ नहीं पता।
- मामकौर, निवासी महेंद्रगढ़।
हमारे गांव के आसपास बेहतर अस्पताल न होने की वजह से भिवानी आंखों का ऑपरेशन करवाने के लिए आया था। आज दूसरी बार अस्पताल में आए हैं, मगर अब ओपीडी में पिछले तीन घंटे से कोई चिकित्सक नहीं बैठा। गर्मी की वजह से पसीने में बुरा हाल है। चेकअप करवाने के लिए लाइन में लगवा जरूर है। ऐसे में काफी परेशानी का सामना कर उपचार करवाने का इंतजार कर रहे हैं।
- वजीर, निवासी महम।
चिकित्सकों के लिए उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र लिख चुके हैं
अस्पताल में लंबे समय से चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं। मगर कोई उचित समाधान नहीं हो पाया है। फिलहाल चिकित्सक न होने की वजह से फार्मासिस्ट ही मरीजों का उपचार करवाने में मदद कर रहे हैं। चिकित्सकों की कमी की कारण कुछ कक्ष खाली हैं। साथ ही मैं खुद दोपहर के खाने तक मरीजों का चेकअप और ऑपरेशन कर करता हूं।
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- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल।

किशनलाल जालान राजकीय नेत्र अस्पताल में ओपीडी के बाहर जमीन पर बैठीं महिला मरीज। संवाद- फोटो : Bhiwani

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