भिवानी। किसान और मजदूरों को मात्र दस रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने वाली अटल किसान-मजदूर कैंटीन की रसोई में भी अब महंगाई का तड़का लग गया है। रसोई के खाने में मिलने वाली सब्सिडी से विभाग ने हाथ पीछे खींच लिए हैं, जिसके बाद अब केवल फसल खरीद सीजन के दौरान ही किसानों और मजदूरों को यहां दस रुपये में भोजन मिलेगा। जबकि ऑफ सीजन मेें यहां के भोजन का दाम भी तीन गुणा महंगा हो गया। कोरोना संक्रमण की वजह से लगे लॉकडाउन के दौरान भी दो माह तक अटल किसान-मजदूर कैंटीन की रसोई में रोजाना 500 प्रवासी मजदूरों के लिए मुफ्त भोजन पका था। रसोई में खाना महंगा होने के बाद यहां आने वाले किसानों और मजदूरों की संख्या भी कम हो गई है।
हरियाणा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से नारी शक्ति कलस्टर के तहत दस महिलाओं के समूह द्वारा नई अनाज मंडी परिसर में अटल किसान-मजदूर कैंटीन की रसोई चलाई जा रही है। हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड ने करीब 11 लाख रुपये का बजट खर्च कर यहां पर कैंटीन के भवन का निर्माण कराया था। जिसके बाद सात फरवरी 2020 को कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल ने विधायक घनश्याम सर्राफ की मौजूदगी में अटल किसान मजदूर कैंटीन का शुभारंभ किया था। रसोई दो साल भी नहीं चली कि इस पर महंगाई के संकट के बादल मंडराने लगे और विभाग ने भी खाने पर देने वाली सब्सिडी से अपना हाथ खींच लिया। दरअसल अटल किसान मजदूर कैंटीन में भोजन की थाली पर 15 रुपये हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड द्वारा सब्सिडी दी जा रही थी। जिसके बाद मंडी में आने वाले किसानों और मजदूरों को यहां दस रुपये में भरपेट भोजन की थाली उपलब्ध कराई जाती थी। सब्सिडी से रसोई का खर्च आसानी से निकल जाता और रोजाना ही करीब 200 से 250 मजदूरों को सस्ता भोजन मिल जाता था, लेकिन विभाग ने सब्सिडी सीजनल कर दी, यानी जब मंडी में किसानों की फसल खरीद होगी, तभी इस कैंटीन में पकने वाले भोजन पर सब्सिडी दी जाएगी। इस लिहाज से साल भर में रबी और खरीफ फसल बिक्री सीजन पर ही ये सब्सिडी मिलेगी। इस हिसाब से साल के 12 महीनों में सिर्फ पांच माह ही सब्सिडी वाला भोजन मिलेगा, जबकि बिना फसल बिक्री यानी आफ सीजन में यहां की रसोई में पकने वाले भोजन पर कोई सब्सिडी नहीं होगी।
दस से 30 रुपये हो गई खाने की थाली, नाश्ता भी 40 रुपये में मिलेगा
अटल किसान मजदूर कैंटीन में सब्सिडी बंद होने के कारण भोजन की थाली दस रुपये से बढ़कर 30 रुपये की हो गई है। जबकि नाश्ते की थाली भी 40 रुपये की गई है। क्योकि इस महंगाई के दौर में भोजन पकाने के लिए सूखा राशन और सब्जियों पर भी ज्यादा खर्च हो रहा है।
महंगा हुआ भोजन तो चार महिलाएं भी हो गई समूह में कम
अटल किसान मजदूर कैंटीन की रसोई में दस महिलाओं का समूह काम कर रहा था। दिसंबर के बाद सब्सिडी बंद हो गई। जिसके बाद यहां सिर्फ छह महिलाएं ही रह गई। जिनमें इंचार्ज बिमला तिगड़ाना, पिंकी, प्रेम, गीता तिगड़ाना, सरला, मरिया शामिल हैैं, जबकि यहां काम छोड़ने वालों में संतोष, संजू, कुसुम, गीता बीरण है।
वर्जन:
हमारा हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड के साथ कैंटीन में 300 थाली भोजन प्रतिदिन का एमओयू साइन हुआ था।, लेकिन रोजाना की औसतन 180 थाली ही आती रही, इसकी वजह से नुकसान हो रहा था। अब विभाग के साथ हमारी बातचीत चल रही है। जिसमें 300 की बजाए 200 थाली प्रतिदिन का एमओयू किया जाएगा। जिसके बाद यहां रोजाना दस रुपये भोजन उपलब्ध संभव हो पाएगा।
- सीखा राणा, जिला समन्व्यक, हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन भिवानी।