भिवानी। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन और हाल ही में हुई दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या के विरोध में अखिल भारतीय मानवाधिकार संगठन (एबीएचआरओ) ने कड़ा रुख अपनाते हुए हत्यारों को फांसी और हिंदुओं की सुरक्षा के लिए ठोस कानून बनाने की मांग की है। इसी क्रम में वीरवार को कोर्ट परिसर में संगठन की बैठक आयोजित की गई, जिसमें बांग्लादेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर सवाल उठाए गए।
बैठक में एबीएचआरओ के राष्ट्रीय महासचिव एचएस तंवर ने कहा कि 18 दिसंबर को बांग्लादेश के मिमेंसिंग जिले में 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या किया जाना न केवल जघन्य अपराध है बल्कि मानवता पर गहरा कलंक भी है। उन्होंने कहा कि ईशनिंदा के झूठे आरोपों के आधार पर एक निर्दोष की जान ले ली गई जो बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
एचएस तंवर ने कहा कि दीपू चंद्र दास की हत्या कोई एकल घटना नहीं है बल्कि यह बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ योजनाबद्ध हिंसा का हिस्सा है। उन्होंने इस कायरतापूर्ण कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। राष्ट्रीय महासचिव ने जानकारी दी कि इस गंभीर मुद्दे पर एबीएचआरओ ने संयुक्त राष्ट्र और यूएनआईसी डायरेक्टर दिल्ली को औपचारिक पत्र लिखकर हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि संगठन जमीनी स्तर के साथ-साथ कानूनी मोर्चे पर भी हिंदुओं को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत में उठाया जाएगा। बैठक में हरियाणा राज्य सचिव अधिवक्ता अनिल तंवर, हरियाणा ऑफिस सचिव जयभगवान एडवोकेट, सदस्य अधिवक्ता अंकित परमार और हरियाणा राज्य सह सचिव अधिवक्ता अक्षय कुमार शर्मा खरकिया भी मौजूद रहे।