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क्यों बंद है ट्रैफिक लाइट, 14 तक देना होगा जवाब

Fri, 26 Feb 2016 01:26 AM IST
भिवानी ब्यूरो ।
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भिवानी। शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए लगाई ट्रैफिक लाइटें क्यों बंद है। क्यों इनका प्रयोग नहीं किया जा रहा। इन सवालों के जवाब नगर परिषद और प्रशासनिक अधिकारियों को 14 मार्च तक लोक अदालत में देने है। एक अधिवक्ता की याचिका पर बृहस्पतिवार को उपभोक्ता फोरम ने ये जवाब मांगे है।करीब दो साल पहले शहर में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए चार जगह ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थी। शहर के घंटाघर चौक, हांसी गेट चौक, महम गेट, चिड़ियाघर मोड़ के पास ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थी। करीब 90 लाख रुपये की लागत से ट्रैफिक लाइटें लगी। कुछ दिन में ही लाइटें बंद कर दी गई। कारण बताया गया कि टाइमिंग सेटिंग नहीं होने के कारण ट्रैफिक मैनेज नहीं हो रहा। दिल्ली से इंजीनियर बुलवाकर टाइम सेटिंग करवाई जाएगी। मगर इन बातों को डेढ़ वर्ष बीत चुका है मगर स्थिति जस की तस है। न इंजीनियर आया और न ही ट्रैफिक लाइटें जली।ट्रैफिक समस्या से परेशान एक अधिवक्ता मुकेश गुलिया ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। लोक अदालत में दायर याचिका के आधार पर उपायुक्त, नगर परिषद, डीएसपी हेड क्वार्टर को तलब किया है। बृहस्पतिवार को मामले पर लोक अदालत में नगर परिषद व प्रशासन की ओर से अधिवक्ता व कर्मचारी पहुंचे। लोक अदालत ने नप अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों से 14 मार्च तक मामले में जवाब देने को कहा है। शिकायत में अधिवक्ता मुकेश गुलिया ने बताया है कि वह पिछले एक साल से बंद पड़ी लाइटों को अधिकारियों से  दोबारा शुरू करने की गुहार लगा चुका हूं। आखिरकार इतना खर्च करने के बाद भी ट्रैफिक लाइटें क्यों शुरू नहीं की जा रही।डीएसपी को दोबारा समनमामले में नगर परिषद व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ डीएसपी को भी पार्टी बनाया गया है। समन भेजे गए थे मगर नप व प्रशासन की ओर से तो प्रतिनिधि पहुंचा मगर डीएसपी की ओर से कोई नहीं पहुंचा। जिसके बाद दोबारा समन भेजे गए है।
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वर्जन::::ट्रैफिक लाइटें लगी होने के बावजूद इनका प्रयोग नहीं किया जा रहा है। लोक अदालत ने नप व प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 14 मार्च है।मुकेश गुलिया, अधिवक्ताशिकायतकर्ता
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