भिवानी। चार दिवसीय छठ महापर्व के लिए पूर्वांचल परिवारों में उत्साह और उमंग है। बुधवार को नहाय खाय के बार खरना की रस्म पर घरों के अंदर विभिन्न तरह के पकवान तैयार किए गए। वहीं तोशाम रोड स्थित जूई नहर पुलिया पर बने छठ माता घाट को भी तैयार किया गया। यहां पर वीरवार शाम को मेला लगेगा वहीं शुक्रवार अल सुबह उगले सूर्य को अर्घ्य के साथ महाव्रत का समापन होगा।
बुधवार को छठ पूजा महापर्व का दूसरा दिन खरना रखा गया, जिसके अपने विशेष नियम होते हैं। इस पर्व में साफ-सफाई और शुद्धता का बहुत अधिक ध्यान रखा जाता है। साथ ही इस दौरान कई नियमों का भी पालन किया जाता है। पांच नवंबर से नहाय खाय के साथ चार दिनों तक मनाए जाने वाले छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। इस त्योहार के दौरान 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखा जाता है।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से छठ पर्व की शुरुआत हो जाती है और सप्तमी तिथि को इसका समापन होता है। यह व्रत सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया को समर्पित होता है। छठ पूजा महापर्व का दूसरा दिन खरना है। जिसके अपने विशेष नियम होते हैं।
देवी प्रसाद, कार्तिकेय, कमलेश, महेश्वरी ने बताया कि छठ महापर्व को लेकर घरों के अंदर विभिन्न तरह के पकवान तैयार किए गए हैं। दूसरे दिन खरना है। वीरवार शाम को घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और शुक्रवार को अल सुबह उगले सूर्य को अर्घ्य के साथ महाव्रत का समापन होगा। ये व्रत हर सुहागिन महिला के लिए उसकी परिवार की सलामती के लिए अहम है।