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ठिठुरन में बेबसी : खुले आसमान में बीत रही रात, प्रशासन ने नहीं बनाए अभी रैना बसेरे

Sat, 18 Nov 2023 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी।
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ठिठुरन की बेबसी में मुसाफिरों व लावारिस लोगों की खुले आसमान के रात बीत रही है। प्रशासन ने अभी तक उनके लिए रैन बसेरे नहीं बनाए हैं। इस बार हवा का प्रदूषण और ठिठुरन दोनों ने एक साथ दस्तक दी है। इससे की इन लोगों की दिन तो कट जाता है, मगर रातें बैचेन हो गई हैं।
जिला प्रशासन के निर्देश पर बवानीखेड़ा, लोहारू और सिवानी उपमंडल में तो सार्वजनिक रैन बसेरों के लिए जगह चिह्नित कर ली गई हैं, मगर भिवानी में अभी रैन बसेरे को ही ठिकाना नहीं मिला है। यानी जहां रैन बसेरा बनना है, उस जगह का ही चयन नहीं हो पाया है। पहले नगर परिषद कार्यालय के अंदर डीएमसी कार्यालय के साथ ही कांफ्रेंस हॉल को रैन बसेरा बनाया गया था, जहां के ठाठ बाठ देखकर भी ऐसा लगता था यहां तो शानदार ठहरने की जगह है, लेकिन यहां चुनिंदा लोग ही सर्द रात बीता पाए, क्योंकि नगर परिषद कार्यालय के अंदर सभी का देर रात तक आना जाना संभव नहीं हो पाया। इस बार कांफ्रेंस हाल में कुछ जीर्णोद्धार का काम होना है। इसलिए इस बार इसे रैन बसेरा नहीं बनाया जाएगा। अब संकट जगह चयन का आ गया है। रैन बसेरा ऐसी जगह भी होनी जरूरी है कि जहां आसानी से लोग बिना किसी झंझट के सर्द रात बीता पाएं और खासकर लावारिस लोगों को भी यहां ठहरने की अनुमति मिल जाए।
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हर साल जिला प्रशासन ठंड की ठिठुरन भरी रातों में लोगों को रैन बसेरा में आश्रय देने के लिए प्रबंध करता है। इसके लिए बवानीखेड़ा, सिवानी और लोहारू कस्बों में रैन बसेरों की जगह का चुनाव हो चुका है। इनमें आने वाले दिनों में रात के समय मुसाफिरों के ठहरने की व्यवस्था संबंधित नगर नगर पालिका की ओर से कराए जाएंगे। जबकि भिवानी में नगर परिषद की ओर से रैन बसेरे खोले जाने हैं। अभी तक भिवानी में जगह का चयन नहीं हुआ है। जबकि रात के समय तापमान में भी गिरावट आने से ठंड बढ़ने लगी है।
भिवानी की अतिरिक्त उपायुक्त एवं डीएमसी अनुपमा अंजलि ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अभय सिंह यादव को रैन बसेरा के लिए नई जगह का चयन का जिम्मा सौंपा है। अब नई जगह चयन में कई खास बात ये भी ध्यान रखनी हैं कि जिस जगह सार्वजनिक रैन बसेरा खोला जाए उसका अधिक से अधिक लोग इस्तेमाल कर पाएं। ये रैन बसेरा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड के अलावा सार्वजनिक स्थलों के आसपास ही बनें, ताकि देर रात तक बाहर से आने वाले लोग भी यहां रात बीता सकें। इसके अलावा शहर भर में लावारिस लोग भी घूम रहे हैं, जिनके लिए दिनभर शहर की फुटपाथ ही ठिकाना हैं, मगर रात बिताने के लिए कोई छत नहीं। ऐसे लोगों की जिंदगी खतरे में न पड़े इसके लिए भी सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों के अनुसार रैन बसेरे की व्यवस्था कराना सरकार और प्रशासन का काम है।


ठंड से मौत के मामले में सख्त हिदायतें
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ठंड से किसी भी व्यक्ति की मौत होने पर जिला प्रशासन व सरकार को जिम्मेदार माना गया है। इसी लिए सरकारों को ये सख्त हिदायतें हैं कि वे ठंड लगने से किसी लावारिस व्यक्ति की मौत न हो इसके प्रबंध समय रहते सुनिश्चित करें। कुछ सामाजिक संगठन भी रात के समय फुटपाथ पर खुले में रात बिताने वालों के लिए गर्म कंबल का प्रबंध कराते हैं। मगर अभी तक ये संगठन भी सक्रिय नहीं हुए हैं।
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मैंने पूरे जिले में रैन बसेरों की व्यवस्था कराए जाने के संबंध में अधिकारियों की बैठक लेकर खास तौर पर हिदायतें जारी कर दी हैं। बवानीखेड़ा, लोहारू और सिवान में रैन बसेरे की व्यवस्था जल्द हो जाएगी। इसके लिए जगह चिह्नित हो चुकी हैं, लेकिन भिवानी में अभी रैन बसेरे के लिए नई जगह का चयन नहीं हुआ है। इसके लिए नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। सोमवार तक जगह का प्रबंध कर रैन बसेरों की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी।
-अनुपमा अंजलि, अतिरिक्त उपायुक्त एवं डीएमसी, भिवानी।
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