हरियाणा साइबर ठगों के निशाने पर है। एटीएम कार्ड का क्लोन बनाकर, करीबियों के संकट में फंसे होने का हवाला देकर और फर्जी तरीके से अंगूठे के निशान और हस्ताक्षर हासिल कर बैंकों से राशि निकालने वाले साइबर ठग अब ठगी के लिए सेक्सटार्शन कर सहारा ले रहे हैं। ये सोशल मीडिया के माध्यम से पहले दोस्ती करते हैं और फिर नंबर हासिल कर बातचीत करते हैं।
इसके बाद ये वीडियो कॉल कर व्यक्ति का अश्लील वीडियो बना लेते हैं और वीडियो वायरल करने के नाम पर ब्लैकमेलिंग कर पीड़ित से विभिन्न खातों में रुपये डलवा लेते हैं। दोस्ती करने, वीडियो बनाने, ब्लैकमेलिंग करने और रुपये ऐंठने का काम गिरोह के अलग-अलग लोग करते हैं और ठगी करते ही इस काम में लाए गए मोबाइल और सीम कार्ड को नष्ट कर देते हैं।
इनका ठगी का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है। अहम बात यह कि शिक्षित और उम्रदराज लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले इस गिरोह के अधिकांश ठग आठवीं पास हैं।
भिवानी साइबर क्राइम पुलिस थाना एसएचओ विकास कुमार ने बताया कि बुजुर्ग की न्यूड वीडियो बनाने के मामले में राजस्थान के आठ साइबर ठगों ने 31 राज्यों के 752 ठगी के वारदात को अंजाम दिए जाने की बात कबूली है। आरोपी जाफर, जिलसाद, जफरुद्दीन, चंदू, आसिर, नासिर इकलास व अकरम आठवीं से बारहवीं पास और महज 18 से 25 साल की उम्र के हैं।
इनके तीन से चार साथी अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। इस गिरोह ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, दिल्ली, हरियाणा, तमिलनाडू, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, वेस्ट बंगाल, कर्नाटका, उत्तराखंड, केरला, छत्तीसगढ़, ओडिशा में साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया है। ये सभी राजस्थान के भरतपुर, डींग और अलवर के आसपास गांवों में रहने वाले हैं।
अश्लील वीडियो बनाकर करते थे ब्लैकमेल
राजस्थान गिरोह में पकड़े गए लोगों से पूछताछ में सामने आया कि ये सभी सुनियोजित तरीके से ठगी करते थे। जिलसाद फर्जी आईडी पर लड़कियों के नाम प्रोफाइल तैयार कर दोस्ती करता था और जाफर के साथ मिलकर न्यूड विडियोकॉल तैयार करता था। इसके बाद जाफर सीबीआई अधिकारी बताकर उस व्यक्ति को कॉल करता था, जिसका अश्लील वीडियो बनाया गया था। जफरुद्दीन वारदात में प्रयोग फोन को ठिकाने लगाता था। ये लोग गलत आईडी पर खोले गए एकाउंट में पैसे डलवाते थे। चंदू धोखाधड़ी से ठगे पैसे एटीएम के जरिए निकालता था। ये हर अपराध में अलग फोन का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने आरोपियों के नंबरों को ट्रेस कर इनके ठगी में इस्तेमाल हुए चैनल जोड़कर इनको पकड़ा था। इन सभी ने ठगी के तरीके इंटरनेट और अपने गांव में ही अन्य युवाओं से सीखे थे।
नूंह, भरतपुर, मथुरा और आगरा साइबरी ठगी के हब
साइबर ठगी का धंधा चलाने वालों के लिए आगरा, डींग, भरतपुर, मथुरा, नूंह, अलवर शहर के ग्रामीण इलाके हब बन चुके हैं। यहां कम पढ़े लिखे युवा भी पढ़े-लिखे लोगों को झांसे में लेकर साइबर ठगी का शिकार बना रहे हैं। चोरी कर ठग फर्जी तरीके से अंगूठे के निशान के क्लोन तैयार कर रहे हैं और बायोमेट्रिक कर लोगों के बैंक खाता को खाली कर रहे हैं।
ऐसे भी करते हैं ठगी
आम तौर पर भूमि की रजिस्ट्री में पढ़े लिखे लोगों की भी बायोमेट्रिक के तौर पर अंगूठे के निशान लिए जाते हैं। उनके हस्ताक्षर भी कराए जाते हैं और और कागजात में उनका आधार नंबर भी दर्ज होता है। ये ठग पोर्टल में सेंध लगाकर यहां से डाटा हासिल कर लेते हैं और फिर ठगी को अंजाम देते हैं।
साइबर ठगी के मामलों में पुलिस की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, इसके बावजूद शिक्षित लोग भी साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने के साथ-साथ पुलिस को भी इस संबंध में तुरंत सूचना दें। भिवानी साइबर क्राइम पुलिस थाना की टीम ने राजस्थान से शातिर ठगी के सदस्यों को पकड़ा है। जो काफी लोगों को ठग चुके थे।
-वरुण सिंगला पुलिस अधीक्षक भिवानी।