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सात माह पहले दिए आदेश पर जांच कराते तो इतना बड़ा कांड नहीं होता : सांसद धर्मबीर

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डीआरडीए हॉल में आयोजित बैठक में अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते सांसद धर्मबीर सिंह व बृजेंद्र स? - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। नगर परिषद के घोटालों को लेकर लोग शहर में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी को लेकर सात माह पहले ही उच्चस्तरीय जांच करवाने के जिला प्रशासन के अधिकारियों को आदेश दिए थे लेकिन जांच नहीं करवाई गई। यदि उसी समय जांच हो जाती तो इतना बड़ा कांड नहीं होता। यह बात सांसद धर्मबीर सिंह ने जिला विकास एवं निगरानी समिति की बैठक में कही।
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उन्होंने कहा कि अब दोबारा स्टेट विजिलेंस से पिछले पांच सालों के कार्यों की जांच कराने के आदेश दिए हैं। अमरूत योजना हो या अन्य योजनाएं या विभिन्न विभागों की दूसरी योजनाएं, सभी की पांच सालों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि अमरूत योजना के तहत करवाए कार्यों की स्टेट विजिलेंस से जांच के लिए उनकी तरफ से बैठक का हवाला देकर प्रदेश सरकार के पास पत्र भिजवाया जाए। उन्होंने फसल बीमा के मुआवजे, गांवों में पानी पहुंचाने को लेकर सवाल किए तो अधिकारियों के पास जवाब नहीं मिले। बैठक में हिसार सांसद बृजेंद्र सिंह भी लचर कार्यप्रणाली खासकर एजेंडा उनके पास नहीं भेजे जाने और पिछली बैठक की एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार नहीं होने पर खफा दिखे।
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वीरवार को डीआरडीए हॉल में जिला विकास एवं निगरानी समिति की बैठक सांसद धर्मबीर सिंह और सांसद बृजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक में उपायुक्त आरएस ढिल्लो, अतिरिक्त उपायुक्त राहुल नरवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक की शुरुआत में ही सांसद बृजेंद्र सिंह अधिकारियों की कार्यप्रणाली से खफा दिखे और सबसे पहले एजेंडा नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आज एजेंडा मिला है तो इसमें क्या करूं और क्या बताऊं। पिछली बैठक की एक्शन टेकन रिपोर्ट अब तक तैयार ही नहीं है।
सांसद बृजेंद्र के बाद सांसद धर्मबीर सिंह ने अधिकारियों से नाराजगी जताई। विभाग अनुसार योजनाओं को लेकर सवाल किए तो अधिकारियों के पास भी कोई जवाब नहीं थे। करीब ढाई घंटे चली बैठक में अधिकारी जवाब ही ढूंढते नजर आए। सांसद ने हरेक विभाग के अधिकारी से वर्तमान की व्यवस्थाओं को लेकर बातचीत की।
सांसदों ने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली करोड़ों रुपये की राशि का सही उपयोग होना चाहिए। सांसद धर्मबीर सिंह ने मनरेगा की समीक्षा पर निर्देश देते हुए कहा कि यह योजना जरूरतमंद लोगों को रोजगार देने के लिए है। मनरेगा के सही क्रियान्वयन को लेकर एक कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें सांसद बृजेंद्र सिंह की तरफ से प्रतिनिधि शामिल होंगे। सांसद ने रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जिले में जहां-जहां भी अंडरपास की जरूरत है, वहां पर अंडरपास के लिए प्रस्ताव बनाकर भिजवाए। उन्होंने बापोड़ा व धारेड़ू में स्कूल इमारत के निर्माण का निर्माण कार्य शुरू न करने पर फिर से नया टेंडर लगाने को कहा। उन्होंने घनी आबादी होने के चलते एनएचएआई को बामला में बाईपास का प्रपोजल तैयार करने के निर्देश दिए। सांसद बृजेंद्र सिंह ने विशेषतौर पर बिजली निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिजली के तारों आदि के कारण आग से फसल जलने से किसान की भरपाई होनी चाहिए। उन्होंने रोडवेज अधिकारियों को पुर, सिवाड़ा, कुंगड़, भैणी, सोरखी व तोशाम के लिए रोडवेज बस सेवा बढ़ाने के लिए कहा। उन्होंने बवानीखेड़ा से तोशाम रेलवे फाटक पर रेलवे ओवरब्रिज का प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए।
सात माह पहले उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिये थे, अफसरों ने नहीं भेजा प्रस्ताव
नगर परिषद घोटाले पर बोलते हुए सांसद धर्मबीर सिंह नेकहा कि सात माह पहले हुई बैठक में पांच साल के दौरान हुए कार्यों की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए थे। अफसरों ने जांच के लिए प्रस्ताव ही नहीं भेजा। अगर पहले जांच हो जाती तो इतना बड़ा घोटाला नहीं होता। अमरूत योजना ही नहीं बाकी सभी कार्यों, सभी विभागों की विभिन्न योजनाओं की भी स्टेट विजिलेंस से जांच होनी चाहिए।
बीमा करवाने वाले किसान तो मारे गए
सांसद धर्मबीर सिंह ने कृषि विभाग और फसल बीमा करने वाले अधिकारियों को भी बैठक में लपेटा। सांसद ने कहा कि बीमा नहीं करवाने वाले किसानों का तो रेवेन्यू अधिकारियों, पटवारी ने 40 फीसदी तक नुकसान दिखाया है और उन्हें मुआवजा मिल गया। मगर जिन किसानों ने फसल का बीमा करवाया, उनका नुकसान कंपनी ने 14 प्रतिशत दिखाया। इस पर अधिकारियों के पास जवाब नहीं था। उन्होंने कहा कि तिगड़ाना गांव में किसी को फसली मुआवजा नहीं मिला। सांगवान गांव में कपास की बर्बाद फसल का अब तक मुआवजा नहीं मिला है। इससे तो बीमा करवाने वाले किसान मारे गए।
तीन साल से पैसा आने के बाद भी खर्च नहीं किया
सांसद धर्मबीर ने कहा कि 2015 में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाई गई थी, जिसके तहत ऑर्गेनिक फसल तैयार करने वालों को 12 हजार रुपये प्रति एकड़ सरकार देगी। पिछले तीन साल से पैसा आने के बाद भी खर्च नहीं कर पाए। अब क्लस्टर बनाने के आदेश दिए हैं।
गांवों में हो पानी की व्यवस्था
पानी के मुद्दे पर बैठक में सांसद कहते रहे कि गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा और अधिकारी जवाब देते रहे कि टैंक फुल हैं। सांसद ने कहा कि हालुवास, रूपगढ़, नीमड़ीवाली, कितलाना, प्रहलादगढ़, झरवाई और दूसरी तरफ कोट, उमरावत, मानहेरू आदि 10-12 गांवों में पेयजल संकट बना है। पीने के पानी की भारी किल्लत है। वहां पानी की व्यवस्था की जाए।
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