सीबीएलयू में आयोजित सेमीनार में उपस्थित अतिथि।
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भिवानी। सीबीएलयू इतिहास विभाग की ओर से हरियाणा का इतिहास, संस्कृति एवं लोक परंपराएं विषय पर दो दिवसीय सेमिनार हुआ। सेमिनार की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल ने की। प्रो. राजकुमार मित्तल ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के वीरों एवं वीरांगनाओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है। हमारे वीर शहीदों ने बढ़ चढ़कर देश की आजादी के संग्राम में भाग लिया एवं अपने प्राणों का बलिदान देकर हमें आजादी दिलाई।
सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि सीडीएलयू के पूर्व कुलपति प्रो. विजय कायत एवं बतौर मुख्य वक्ता के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रविंद्र शर्मा, बतौर वक्ता प्रो. मनमोहन कुमार, डॉ. महेंद्र रहे। सेमिनार के संयोजक विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. रविप्रकाश, सह संयोजक डॉ. सुखबीर एवं डॉ. समुद्र हुड्डा रहे।
अध्यात्मवाद हरियाणा की देन : प्रो. विजय कायत
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. विजय कायत ने कहा कि अध्यात्मवाद हरियाणा की देन है। उन्होंने कहा कि हरियाणा प्राचीन समय से ही व्यापार का केंद्र रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक प्राचीन व्यापार केंद्र रेवाड़ी के पीतल उद्योग का उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रो. रविंद्र शर्मा ने हरियाणा के गौरवमयी इतिहास, संस्कृति और परंपराओं पर चर्चा प्रारंभ कर हरियाणा की उत्पत्ति से लेकर वर्तमान हरियाणा के संदर्भ में बारीकी से प्रकाश डाला। सेमिनार में मंच का संचालन डॉ. स्नेहलता शर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. मनमोहन सिंह, डीन शैक्षणिक प्रो. राधेश्याम, प्रो. संजीव कुमार, प्रो. ललिता गुप्ता, डॉ. सुरेश मलिक, प्रो. बाबूराम, डॉ. महेंद्र, डॉ. दीपक, डॉ. सुखबीर, डॉ. समुद्र, डॉ. पूनम शर्मा, डॉ. उमा शाह उपस्थित रहे।