बहल। ब्रह्माकुमारीज की बहल शाखा में संस्थान की पूर्व प्रमुख दादी रत्नमोहिनी को कार्यक्रम आयोजित कर उनको याद किया गया। ब्रह्माकुमारीज के अनुयायियों व कस्बे के गणमान्य लोगों ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला और कहा कि दादी रत्नमोहिनी ने जीवन पर्यंत मानवता की भलाई के लिए काम किया।
रविवार को केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में संचालिका राजयोगिनी बीके शकुंतला ने कहा कि दादी का जीवन कठिन मेहनत, त्याग और समर्पण से भरा रहा है। मात्र 12 साल की आयु में वे वर्ष 1937 में इस संस्था से जुड़ी थी। दादी ने अपने अथक साहस, त्याग और तपस्या से मानवता की भलाई के लिए जो काम किया, वो हमेशा अविस्मरणीय रहेगा।
उन्होंने अपने नेतृत्व में ब्रह्माकुमारीज के 6,000 केंद्रों पर करीब 50,000 बीके बहनों को इस योग्य बनाया कि वो अपना जीवन समर्पित करके मानव सेवा के लिए तैयार हो सकें। अंतिम क्षणों तक उन्होंने हर वर्ष 600 नई बीके बहनों को ट्रेनिंग दी। इस अवसर पर कृष्ण वर्मा, शब्द ठेकेदार, नंदलाल मिस्त्री, सूरजभान सैनी, सोमबीर श्योराण, कर्ण सिंह कासनी, कुलदीप लाइनमैन, रोशनलाल, बीके लक्ष्मण, महिपाल तक्षक, अक्षय जांगड़ा, मुरारी जांगड़ा, लाली, जगमति, कमलेश, राजो, कुसुम साबू, बीके पूनम, बीके मीनू, बीके दिव्यता मौजूद रहे।