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Bhiwani: स्वतंत्रता सेनानी का गांव आदर्श गांव कलिंगा, 32 हजार की आबादी, तीन पंचायतों के लिए होगा चुनाव

Mon, 10 Oct 2022 02:30 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)

सार

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने 25 मई 2007 में आदर्श गांव का दौरा किया था। सेना में भी युवाओं ने देश की सीमाओं पर मोर्चा बंदी संभाली। 
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गांव कलिंगा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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भिवानी जिले में भिवानी-रोहतक मुख्य मार्ग शहर से करीब 24 किलोमीटर दूर स्थित गांव कलिंगा में तीन पंचायतें हैं। इस गांव में 32 हजार से अधिक लोगों की आबादी भी है। खास बात यह है कि ये गांव देश के स्वतंत्रता आंदोलन में अहम योगदान देने वाले पंडित नेकीराम शर्मा का पैतृक गांव है।

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इसी वजह से इसे आदर्श गांव घोषित किया था। 25 मई 2007 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने गांव में पहुंचकर कई विकास योजनाओं का शिलान्यास भी किया। गांव के युवा भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सीमाओं पर तैनात है। वहीं हजारों पूर्व सैनिक भी इसी गांव से हैं। 

भिवानी जिले के सबसे बड़े गांवों में से एक कलिंगा भी है। यहां तीन सरपंच चुने जाते हैं। इनमें राजू पाना, अमरू पाना और सवाई पाना शामिल है। गांव में करीब दस हजार से अधिक मतदाता भी हैं। कलिंगा को आदर्श गांव घोषित होने के साथ ही इसमें काफी विकास कार्य कराए गए और करीब 36 करोड़ का बजट भी खर्च हुआ। मगर अभी भी ग्राम पंचायतों से ग्रामीणों को काफी उम्मीदे हैं।
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पूर्व राष्ट्रपति के गांव में आने की निशानी आज भी वहां मौजूद हैं, उन्होंने अपने हाथों से गांव के हर्बल पार्क में त्रिवेणी लगाई थी, जिनके नाम का पत्थर भी वहां लगा है। धीमाण खाप का भी ये बड़ा गांव है। जहां पंचायती फैसलों पर ही यहां के लोगों की सहमति होती है। अधिकतर बड़े फैसले भी धीमाण खाप यहां की ऐतिहासिक चौपाल पर बैठकर लेती है। 

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गांव की वर्तमान में है यह स्थिति
गांव में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग बारहवीं तक के सरकारी स्कूल हैं। पशु अस्पताल, आयुर्वेदिक व सामान्य डिस्पेंसरी है। एक जलघर और व्यायामशाला है। सभी समुदायों की अपनी चौपाल है। बसें रुकती हैं मगर स्टैंड नहीं है। गांव में कोई लाइब्रेरी या ऐतिहासिक संग्रहालय नहीं है। पंचायतों के पास खुद की कोई भूमि नहीं है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधा भी नहीं है यानी कोई सीएचसी नहीं है। 

बारिश में होता है जलभराव
गांव कलिंगा सबसे बड़ा और आदर्श गांव है। लेकिन यहां बारिश के दौरान जलभराव होता है। पानी निकासी के सिर्फ अस्थायी प्रबंध किए जाते हैं। जिसकी वजह से गांव में अधिकतर गलियां, जोहड़ व सार्वजनिक पार्क भी बदहाल हो चुके हैं। गंदे पानी की निकासी का भी कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। मानसून में तो बारिश का पानी आबादी तक पहुंच जाता है।

मैंने पिछली योजना में सवाई पाना से सरपंच का चुनाव लड़ा और जीत गया था। पिछली बार गांव के तीनों ही पानों में सामान्य वर्ग पुरुष के लिए सरपंच पद था, मगर अबकी बार अमरू पाना सामान्य पुरुष, राजू पाना सामान्य वर्ग महिला व सवाई पाना एससी वर्ग पुरुष के लिए आरक्षित हो गया है। इसलिए मैने अबकी बार जिला पार्षद का चुनाव लड़ने का मन बनाया है। हमारा गांव बड़ी पंचायतों वाले गांवों में आता है। जिसमें तीन सरपंच बनते हैं। -ठाकुर रामभूल, पूर्व सरपंच, सवाई पाना कलिंगा।  

हमारे गांव में पंचायती चुनावों के दौरान माहौल काफी गहमागहमी भरा रहता है। गांव के कई बूथ तो संवेदनशील और अतिसंवेदनशील भी बने रहते हैं। गांव बड़ा है तो यहां विकास कार्यों की संभावनाएं भी अपार है। गांव में नई पंचायत से अधूरे पड़े विकास कार्यों को पूरा कराने की उम्मीद है। -सतपाल, ग्रामीण कलिंगा। 

पंचायती चुनावों की घोषणा होने से पहले ही प्रत्याशी यहां पर चुनावी मैदान में कूद चुके थे। अब ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। हमारा गांव सैनिकों व स्वतंत्रता सेनानी का है। इसे आदर्श गांव का दर्जा भी मिला है। मगर अब भी गांव में कई ऐसे कार्य हैं, जिनकी यहां सख्त जरूरत है। उम्मीद है नई पंचायत गांव में नए विकास कार्य कराकर यहां के लोगों की जरूरतों को समझे। -जयप्रकाश नंबरदार, कलिंगा।
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पंचायती चुनाव में युवा वोटर भी अहम रहेंगे। क्योंकि गांव में काफी युवाओं के इस बार नए वोट बन गए हैं। मैं भी इस बार पंचायती चुनावों में मतदान करूंगा। पंचायत चुनाव हमारे गांव के विकास के लिए काफी अहम हैं। - युवा जोगेंद्र कलिंगा।

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