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Bhiwani News: ओआरओपी के मुद्दे पर सेवानिवृत्त सेना अधिकारी मोदी के मुरीद, अग्निपथ योजना से नाराजगी

Mon, 30 Sep 2024 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी के गांव बापोड़ा में रखा टैंक।
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श्याम नंदन कुमार
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भिवानी। प्रदेश में सैनिकों के मुद्दे पर सियासत गर्म है। अग्निवीर, अनुच्छेद 370 और वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) का मुद्दा राजनीतिक दल चुनावी सभाओं में उछाल रहे हैं। सत्ता पक्ष इन तीनों योजनाओं को सुधार और सेना व सैनिकों की बेहतरी के लिए उठाए गए कदम के रूप में पेश कर रहा है, वहीं, विरोधी दल कांग्रेस अग्निपथ योजना के मुद्दे पर लगातार केंद्र और प्रदेश की सरकार को घेर रही है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अमर उजाला ने इन तीनों मुद्दों पर सैनिकों के सबसे बड़े गांव बापोड़ा और भिवानी के दूसरे गांवों में सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों और जवानों ने बात की। बापोड़ा पूर्व थल सेनाध्यक्ष और केंद्र सरकार में मंत्री रहे जनरल वीके सिंह का गांव हैं। यहां हर दूसरे घर में सेना के जवान हैं। इस गांव के सेवानिवृत्त सेना अधिकारी जहां ओआरओपी और अनुच्छेद 370 हटाने के लिए मोदी की मुक्त कंठ प्रशंसा करते हैं, वहीं अग्निपथ योजना को लेकर गुस्से का इजहार करने से भी नहीं हिकचते। कहते हैं- इस योजना ने युवाओं में हीन भावना पैदा की है। सैनिकों में भी एक अलग श्रेणी हो गई है। सरकार नहीं चेती तो नुकसान तय है।


गौरव का प्रतीक है टी 55 टैंक, युवाओं के लिए सेल्फी प्वाइंट

भिवानी-हिसार राजमार्ग पर स्थित सैनिकों के गांव बापोड़ा के प्रवेश द्वार के पास ही वीरता का प्रतीक टी 55 टैंक रखा है। पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने केंद्रीय मंत्री बनने के बाद सैनिकों के सम्मान में इस टैंक की स्थापना कराई थी। युवाओं के लिए यह सेल्फी प्वाइंट है। गांव के एक युवा मनोज ने बताया कि इस गांव में हर दूसरे घर में सैनिक हैं। थोड़ा आगे बढ़ने पर मुख्य मार्ग पर ही दो-तीन दुकानें खुली मिलीं। लोग आपस में बतिया रहे थे। चुनावी माहौल जनना चाहा तो अग्निपथ, ओआरओपी पर बतौर आम नागरिक खुलकर अपनी बात रखी। सतपाल सिंह ने कहा- वन रैंक वन पेंशन और अनुच्छेद 370 हटाने से जो लाभ भाजपा को मिलना था, उसे अग्निपथ ने खत्म कर दिया। हालांकि उनके बगल में पेंट की दुकान पर बैठे अशोक ने कहा कि भाजपा ने कई अच्छे काम किए हैं। अब तो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और गृह मंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं कि अग्निवीर पद से लौटे युवाओं को पक्की नौकरी देंगे। उन पर भरोसा करना चाहिए। भाजपा ने पारदर्शिता के साथ युवाओं को नौकरी दी है। इसका उसे इनाम दिया जाना चाहिए।
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अग्निपथ योजना से युवाओं में हताशा

सेना से सेवानिवृत्त नायब सूबेदार वीरेंद्र सिंह का कहना है कि वन रैंक वन पेंशन पर सरकार ने बेहतर काम किया है। अनुच्छेद 370 हटाना भी देशहित में है, लेकिन केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना देशहित में नहीं है। चुनाव में भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। अग्निपथ योजना देश को गड्ढे में डालने वाली योजना है जितने भी सैनिक हैं, उनको पूरी नौकरी और पूरा प्रशिक्षण दिया जाए तभी देश सुरक्षित हो सकता है। सरकार को अपनी नीति में सुधार करना चाहिए। वीरेंद्र सिंह ने कहा कि इस योजना से युवाओं में हताशा है। युवा कहते हैं कि यह योजना हमारे हित में नहीं है। सरकार ने इस योजना से हमारे सपनों को बर्बाद किया है।



दो मोर्चों पर जंग की स्थिति में आएंगी मुश्किलें

बापोड़ा निवासी सेवानिवृत्त कैप्टन किरण पाल का कहना है कि अग्निपथ योजना के प्रति युवाओं और सैनिकों में रोष है। जनता इस योजना के खिलाफ है। सैनिक के लिए नुकसान यह है कि चार साल में वह पूरा सैनिक नहीं बन सकता। चार साल में उसे युद्धाभ्यास का पर्याप्त मौका नहीं मिल सकता। वह एक साल की ट्रेनिंग करेगा और अपनी यूनिट में ड्यूटी करके वापस आ जाएगा। इससे युवाओं में उत्साह कम हुआ है। पहले सड़कों पर और मैदान में सुबह शाम तैयारी करने वालों की लाइन लगी रहती थी, अब युवा नहीं दिखते। सरकार को सोचना चाहिए कि हमारे दो पड़ोसियों चीन और पाकिस्तान से हमारे संबंध अच्छे नहीं हैं। अगर दोनों फ्रंट पर हमें लड़ना पड़ जाए तो अग्निपथ योजना के बूते हम सफल नहीं हो सकते। सेना का मुख्य उद्देश्य देश की रक्षा करना है। बेसिक ट्रेनिंग में युद्ध की ट्रेनिंग उतनी नहीं मिलती। युद्ध की ट्रेनिंग तो यूनिट, ब्रिगेड और डियू के वर्कशॉप और युद्धाभ्यास में ही मिलता है। चार साल में यह संभव नहीं है।


ओआरओपी से जवानों को मिला है फायदा

सूबेदार ओमप्रकाश का कहना है कि ओआरओपी योजना सही है। इससे सैनिकों को लाभ मिला है। जो सही है, उसे गलत नहीं कह सकते। लेकिन अग्निपथ योजना सही नहीं है। पहले की योजना ठीक थी। 15 साल की भर्ती सही थी। पेंशन बन जाती थी। अब इस योजना से काफी नुकसान है। इसका चुनाव में काफी फर्क पड़ेगा। लोकसभा चुनाव में फर्क दिखा है। विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनेगा। मध्य वर्ग के लिए यह कुठाराघात है। राजपूत, जाट, ब्राह्मण और सिख समाज के लोग जो शौक से सेना में जाते थे, वे इसके खिलाफ हैं।
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रिश्ते पर भी पड़ रहा है असर

सेवानिवृत्त सूबेदार ओमप्रकाश कहते हैं कि बहादुर जातियां राजपूत, जाट, सिख और ब्राह्मण के लिए सेना की नौकरी शादी का बड़ा जुगाड़ था। पहले फौजी की शादी फटाफट हो जाती थी। हरियाणा में शादी से पहले लड़की के घर वाले देखते हैं कि दामाद पेंशन वाली नौकरी करे या अधिक जमीन हो। मध्य वर्ग के लिए सेना की नौकरी बड़ा जुगाड़ था। अब जैसे ही लड़की वाले जानते हैं कि लड़का अग्निवीर है, शादी से इन्कार कर देते हैं। गांव बीरण निवासी फौजियों का भी लगभग ऐसा ही मानना है लेकिन वे हताश नहीं है। बीरण निवासी सेवानिवृत्त फौजी श्री भगवान को भरोसा है कि सरकार योजना में सुधार करेगी। अग्निपथ से लौटे युवाओं को नौकरी मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमित शाह और सीएम नायब सिंह सैनी ने वादा किया है कि अग्निवीरों को दोबारा नौकरी दी जाएगी। हमें सरकार पर भरोसा रखना चाहिए।
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