हरियाणा के भिवानी जिले में पांच हजार साल पुरानी हड़प्पा कालीन सभ्यता के अवशेष भूमि की खुदाई के दौरान मिले हैं। भिवानी-जींद मुख्य मार्ग पर शहर से मात्र 10 किलोमीटर दूर गांव तिगड़ाना के खेड़ा पर अवशेष खुदाई के दौरान मिले हैं। यहां पर महेंद्रगढ़ के गांव पाली स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की पुरातत्व विभाग की टीम ने चार साल बाद रविवार को फिर से खुदाई शुरू की है। विभिन्न यूनिवर्सिटियों के शोधार्थी भी अवशेष खोजने में जुटे हैं। अब देशभर की विभिन्न यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों के लिए यह अहम साबित होगा।
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इससे पहले मई 2016 में भी हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की टीम यहां पर खुदाई के दौरान मनके, मिट्टी के बर्तन, अर्ध कीमती पत्थर और तांबे की वस्तुएं, पेस्ट मटेरियल की हरे रंग की चूड़ियां बरामद कर चुके हैं। इन सभी वस्तुओं का लोग पांच हजार साल पहले रोजमर्रा के लिए इस्तेमाल करते थे। हरियाणा के भिवानी जिला में चार जगह हड़प्पा कालीन सभ्यता के व्यापक स्तर पर अवशेष मिलने के बाद विभिन्न यूनिवर्सिटियों के शोधार्थी भी यहां पर भूमि की काफी गहराई में एक पूरी सभ्यता इतिहास खोजने में जुटे हैं।
हरियाणा केंद्रीय यूनिवर्सिटी का यहां रिसर्च का अभियान ढाई माह तक चलेगा, इस दौरान 10 से अधिक राज्यों के इतिहास में पीएचडी करने वाले शोधार्थी भी यहां पहुंचकर हड़प्पा कालीन इतिहास से रूबरू होंगे और इतिहास में मानव सभ्यता के रहन-सहन, खान-पान, व्यापार, हाउस प्लान, पशुपालन और कृषि से जुड़ी बातों का अध्ययन करेंगे। एक बार फिर से शुरू की गई खुदाई में पुरातत्व विभाग की टीम को मिट्टी के बर्तनों के साथ पत्थर के औजार भी मिले हैं, जिनका इस्तेमाल उस समय लोग घरेलू कार्यों में करते थे।
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भिवानी में चार जगह मिल चुके हैं निशान
विभिन्न विश्वविद्यालयों के पुरातत्व विभागों की टीमों ने हरियाणा के भिवानी जिला में चार जगह हड़प्पा कालीन सभ्यता से जुड़े निशान खोज निकाले हैं। इनमें भिवानी-रोहतक मुख्य मार्ग पर शहर से दस किलोमीटर दूर गांव नौरंगाबाद का खेड़ा शामिल हैं, जहां पर 2001 में यौध्य (कुषाण) सभ्यता के अवशेष मिल चुके हैं। इसी तरह गांव मिताथल में 1968 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के प्रो. सुरजभान हड़प्पा कालीन अवशेषों की खोज कर चुके हैं।
इसी तरह गांव मानहेरू में दिल्ली व एमडीयू यूनिवर्सिटियों की संयुक्त रिसर्च टीमें 2009 में प्रो. आरसी ठाकरान और प्रो अमर सिंह के नेतृत्व में खुदाई के दौरान हड़प्पा कालीन सभ्यता के अवशेष विशेष संग्रहालयों तक पहुंचा मानव सभ्यता के इतिहास से पर्दा उठा चुके हैं। तोशाम क्षेत्र के खानक में भी प्रोफेसर आर.एन सिंह के नेतृत्व में बनारस यूनिवर्सिटी की पुरातत्व टीम ने 2016 में खुदाई कर हड़प्पा कालीन सभ्यता खोज निकाली थी।
2016 में मात्र 20 दिन चली थी तिगड़ाना के खेड़ा में रिसर्च
हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने बताया कि मई 2016 में तिगड़ाना के करीब 25 एकड़ क्षेत्रफल में फैले ऐतिहासिक खेड़ा की खुदाई की थी। रिसर्च केवल 20 दिन तक चली थी, इस दौरान यहां पर हड़प्पा कालीन सभ्यता से जुड़े काफी ऐतिहासिक वस्तुएं मिली थी, जिसकी रिपोर्ट को भी पुरातत्व विभाग ने व्यापक शोध कार्य की कसौटी पर खरा उतरने के बाद सार्वजनिक कर दिया है।
अब एक बार फिर तिगड़ाना के खेड़ा की खुदाई कर रिसर्च शुरू किया गया है। इस बार उनका रिसर्च ढाई माह तक चलेगा। इस दौरान सभ्यता से जुड़े इतिहास पर व्यापक स्तर पर शोधार्थी भी यहां आकर रिसर्च करेंगे।
तिगड़ाना के खेड़ा में पुरातत्व विभाग की खुदाई के दौरान मिट्टी के बर्तन, तांबे की वस्तुएं, फियान्स (पेस्ट मटेरियल की हरे रंग की चूड़ियां) सफेद रंग के मनके जिनका इस्तेमाल गहनों के लिए किया जाता था। अर्ध कीमती पत्थर भी जमीन के नीचे से निकले हैं। ये सभी वस्तुएं पांच हजार साल पहले लोग इस्तेमाल करते थे। उस समय कृषि प्रधान सभ्यता में लोग पक्के मकानों के अंदर रहते थे, जिनके घर भी सुव्यवस्थित ढंग से बने होते थे। हरियाणा की पहली सभ्यता राखी गढ़ी में मिल चुकी हैं। इसी सभ्यता के अंश भिवानी में भी चार जगह भूमि खुदाई में मिले हैं।
इस पर शोधार्थी करेंगे रिसर्च
केंद्रीय यूनिवर्सिटी पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने बताया कि हड़प्पा कालीन सभ्यता में कैसे लोग रहते थे, कौन-कौन सी फसलें उगाते थे, उनका हाउस प्लान कैसा था। मकानों का ढांचा किस प्रकार का होता था। कौन-कौन से पशु पालते थे। किन-किन वस्तु का व्यापार करते थे। इन पहलुओं पर शोधार्थी रिसर्च करेंगे। यहां से एकत्रित की गई वस्तुएं यूनिवर्सिटी की पुरातात्विक लाइब्रेरी में शोध के लिए भेजी जाएगी, जिसके बाद इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।