भिवानी। गर्मी की शुरुआत में ही शहर में लोग जल संकट से घिर गए हैं। लोगों को पेयजल मुहैया कराने में अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। वहीं पानी के टैंकरों की भी एक बार फिर डिमांड बढ़ गई है। प्राइवेट पानी के टैंकरों के लिए भी लोगों को अब 1200 रुपये से दो हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भी रोजाना 50 से 60 पानी के टैंकर ही भिजवा पा रहा है। वहीं डिमांड 70 से 80 पानी टैंकरों की आ रही है। वार्ड पार्षदों के भी जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों के पास पानी टैंकरों को लेकर फोन घनघना रहे हैं।
दरअसल, शहर की बाहरी कॉलोनियों में पानी की राशनिंग से पहले ही जल संकट के आसार बन चुके हैं। क्योंकि यहां पेयजल लाइन नहीं है, वहीं भूमिगत पानी भी पीने लायक नहीं है। इन कॉलोनियों के लोग पानी के टैंकरों पर ही निर्भर हैं। ये लोग जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मुफ्त पानी के टैंकरों की भी टकटकी लगाए बाट देखते हैं। कभी कभार पानी का टैंकर पहुंचता है तो उस पर पानी भरने वालों की बर्तनों के साथ भीड़ भी टूट पड़ती है। महिलाएं और बच्चे पानी को बर्तनाें में भर घर ले जाने की होड़ में भी जुट रहे हैं।
शहर के पुराने जलघर की हालत पानी को लेकर काफी पतली हो चुकी है। इसी को लेकर पानी की राशनिंग भी अब होने लगी है। गली-मोहल्लों में हैंडपंप पर भी अब काफी भीड़ जुट रही है। क्योंकि पीने के पानी का अब हैंडपंप ही सहारा बने हैं। शहर की कई कॉलोनियों के अंदर गंदे पानी की आपूर्ति ने भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। क्योंकि टेल तक लगने वाले घरों के अंदर पानी नहीं पहुंच रहा है। मोटर चलाने पर गंदा पानी ही आ रहा है।
शहरी दायरे में पानी की दिक्कत चल रही है। मगर विभाग का पूरा प्रयास है कि एक दिन छोड़ एक दिन पूरी सप्लाई मुहैया कराई जाए। वहीं शहरवासियों से भी अनुरोध किया जा रहा है कि वे पानी की अहमियत को समझे और इसे बचाने का पूरा प्रयास करें, तभी इस स्थिति से बाहर आ सकते हैं।
- ताजदीन, कनिष्ठ अभियंता, शहरी पेयजल शाखा।