हालात यह है कि फैमिली आईडी में विद्यार्थियों के बैंक खातों की वेरिफिकेशन नहीं होने से उनकी छात्रवृत्ति व सरकार से मिलने वाली योजनाओं का लाभ भी रुक गया है। भिवानी जिले में तीन लाख 20 हजार से अधिक परिवार पहचान पत्र बनाए जा चुके हैं। जबकि नई फैमिली आईडी बनाए जाने के विकल्प खुलने के बाद भी बाधाएं कम नहीं हो रही हैं। अब दो फैमिली आईडी में एक ही मोबाइल नंबर को दर्ज नहीं कराया जाएगा। एक फैमिली आईडी में केवल एक ही मोबाइल नंबर को रजिस्टर्ड कराया जा सकता है।
पहले सीएससी में फैमिली आईडी बनाने के दौरान कोई भी मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड दर्शा दिया जाता था, मगर ओटीपी को लेकर संशय बना रहता था। इसीलिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदलने का विकल्प खुला है। इसमें कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल फोन से अपना रजिस्टर्ड नंबर दर्ज करा सकता है। एक नंबर केवल एक ही आईडी में इस्तेमाल होगा। दूसरी आईडी में इस्तेमाल होने वाली आईडी बंद होगी। संवाद
फैमिली आईडी में नाम दर्ज कराने से पहले अपडेट कराना होगा बच्चों का आधार कार्ड
परिवार में कई बच्चों के जन्म के काफी सालों तक उनके नामकरण नहीं किया जाता। ऐसे बच्चों के नाम फैमिली आईडी में दर्ज कराने से पहले उनका आधार कार्ड भी अपडेट कराना होगा। इसके बाद ही फैमिली आईडी में उनका नाम दर्ज होगा। ऐसे बच्चों की जन्मतिथि की वेरिफिकेशन भी फैमिली आईडी में होगी।
मजदूर भी फैमिली आईडी में कर रहे सरकारी नौकरी
परिवार पहचान पत्र में दर्ज व्यवसाय का विकल्प बंद है। जिस समय फैमिली आईडी बनवाई थी, उस समय परिवार के मुखिया का व्यवसाय मजदूरी दर्ज कराया था, लेकिन अब उन्हें भी डाटा अपडेट करने के बाद सरकारी नौकरी में दिखा दिया है। ऐसा इसलिए भी हुआ है कि कुछ अर्से पहले क्रीड ने कौशल रोजगार निगम से डाटा उठाया था, जिसकी वेरिफिकेशन के बाद इसे अपलोड कर दिया है। कई युवाओं को कौशल रोजगार में नाम दर्ज होने के बाद उनके परिवार पहचान पत्र में उनका रोजगार स्वत: बदल गया। ये युवा अब भले ही नौकरी छोड़ चुके हैं, मगर फैमिली आईडी में अब भी कमा रहे हैं।
जिले में साढ़े पांच हजार किरायेदारों की बढ़ी मुश्किलें
भिवानी जिले में करीब साढ़े पांच हजार ऐसे परिवार हैं जो या तो प्रवासी हैं या फिर उनका खुद का घर नहीं है तो वे किरायेदार के तौर पर दूसरे के मकानों में रह रहे हैं। फैमिली आईडी में बिजली मीटर की शर्त की वजह से किरायेदारों के संयुक्त परिवार अब अलग से अपनी फैमिली आईडी नहीं बनवा पा रहे हैं। क्योंकि कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनके सदस्यों की शादी हो चुकी है और बच्चे भी हैं, मगर अब भी वे किरायेदार होने की वजह से एक ही फैमिली आईडी का हिस्सा बनकर रह गए हैं। उन्हें अलग होने के लिए मकान में बिजली मीटर का नंबर दर्ज कराना होगा। जबकि उनका खुद का कोई मकान ही नहीं है। मकान मालिक का मीटर नंबर किरायेदार की फैमिली आईडी में दर्ज नहीं हो सकता। क्योंकि वह पहले से ही मकान मालिक की आईडी में दर्ज है।
परिवार पहचान पत्र में केवल एक ही रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है। बशर्ते ये नंबर किसी दूसरी फैमिली आईडी में दर्ज नहीं होना चाहिए। इसके अलावा फैमिली आईडी के काफी विकल्प को लेकर दुविधा बनी है, जिसको लेकर अगले सप्ताह पंचकूला मुख्यालय में बैठक बुलाई गई है। इसमें ये मामले रखे जाएंगे। इसके बाद ही उनका कोई समाधान या विकल्प तलाशा जाएगा।
- खुशवंत सिंह, जिला समन्वयक, नागरिक संसाधन एवं सूचना विभाग भिवानी।