भिवानी। घोसियान चौक के पास न्यू वासकी नाथ रामलीला कमेटी की ओर से जारी रामलीला मंचन के चौथे दिन दशरथ मरण का मंचन हुआ। इस दौरान दर्शकों ने रामलीला में कला का प्रदर्शन कर रहे कलाकारों की हौसला अफजाई की। रामलीला में श्रवण की भूमिका संजय पंवार, दशरथ की भूमिका महाबीर सैनी, राम की भूमिका मुकेश वर्मा, लक्ष्मण की भूमिका सुरेश सैनी, श्रवण की माता की भूमिका पीपला, पिता बिंदर सैनी, निखाद राज, लीलू प्रजापति, केवट दीपक ने निभाई।
प्रधान संजय पंवार, सुरेश सैनी, प्रजापति रत्न ने बताया कि कैकेयी ने राम को वनवास भेजा और राम अयोध्या छोड़कर राम लक्ष्मण के साथ वन की ओर चल दिए। सीता और मंत्री सहित दोनों भाई श्रृंगवेरपुर जा पहुंचे। वहां गंगाजी को देखकर राम रथ से उतर पड़े और दंडवत किया। निषादराज ने चरणरज ली। मंत्री सुमंत अयोध्या लौटकर आ गए। राम को वापस न लाने का मलाल उनको रहा। जब अवध नरेश को यह ज्ञात हुआ कि राम, लखन और सीता वापस नहीं आए हैं तो उन्होंने राम नाम पुकारते हुए प्राण त्याग दिए। मंचन के भावुक दृश्य को देखकर भावविभोर दर्शकों की आंखें भी नम हो गई। जिस समय दशरथ प्राण त्यागने को होते है, वे अपनी पत्नी को याद दिलाते है कि मेरे द्वारा अनजाने में माता-पिता के परमभक्त श्रवण कुमार की मौत हो गई थी।
उन्होंने कहा कि हमारे भिवानी में पहले काफी जगह रामलीला होती थी लेकिन अब बीते वर्षो से यह कर्म कम हुआ है और आज सिर्फ यहां भिवानी में एक ही जगह रामलीला हो रही है जिसके लिए रामलीला कमेटी का बहुत ही धन्यवाद और अभिनंदन की पात्र है जिसने अपनी परंपरा को जिंदा रखा और हमारी नई पीढ़ी को इस के दर्शन कराए कि किस प्रकार से पुराने समय से रामलीला होती आ रही है।