हरियाणा के भिवानी में नगर परिषद घोटाले में तत्कालीन चेयरमैन रण सिंह यादव और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव के कुबूलनामे के बावजूद राशि की रिकवरी नहीं होने पर अब आरोपियों की प्रॉपर्टी अटैच की तैयारी हो गई है। घोटाले में आगे की कार्रवाई अब बहुत कुछ नगर परिषद के तत्कालीन सचिव राजेश मेहता और रिमांड पर चल रहे दोनों आरोपी अकाउंटेंट संजय बंसल और सुरेश कुमार के इर्दगिर्द घूम रही है।
मामले में खानापूर्ति की जा रही है। घोटाला किया गया है यह बात आरोपी स्वयं कुबूल कर चुके हैं। इसके बावजूद रिकवरी नहीं की गई। इतना ही नहीं उन्हें बचाने के लिए जेल भेज दिया गया। इनकी प्रॉपर्टी अटैच कर घोटाले की राशि रिकवर करनी चाहिए। वह जनता का पैसा है, जो शहर के विकास के लिए आया था। -किरण चौधरी, पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता
नप घोटाला बड़े स्तर का है। अब तक तो चेक घोटालों की ही जांच चल रही है, जिसमें भी असल आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। बैंक मैनेजर, फर्म मालिक जैसे छोटे-छोटे आरोपियों से तो रिकवरी की गई और बड़े आरोपियों से कोई रिकवरी नहीं, जबकि वे अपने बयान में स्वयं 10 करोड़ से ज्यादा की राशि लेने की बात कुबूल चुके हैं। सही जांच हो तो चेक घोटाला, जमीन घोटाला करीब 450 करोड़ से अधिक का मिलेगा। -सुदर्शन जिंदल, शिकायतकर्ता
मामले में अब पुलिस के साथ-साथ विजिलेंस भी आरोपियों को बचाने में जुटी है। मगर ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। शहरवासियों को साथ लेकर भिवानी बचाओ आंदोलन के तहत आवाज उठाई जाएगी और इस मामले की सीबीआई जांच का दबाव बनाया जाएगा। -सुशील वर्मा, संयोजक, भिवानी बचाओ आंदोलन।