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भिवानी नगर परिषद घोटाला: रिकवरी नहीं होने पर अब आरोपियों की प्रॉपर्टी अटैच करने की तैयारी

Sun, 03 Apr 2022 10:29 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)

सार

नप के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव और तत्कालीन सचिव संजय यादव के जेल जाने के बाद तत्कालीन सचिव राजेश मेहता से ही मामले में बड़े खुलासे की आस है। दोनों आरोपी अकाउंटेंट सुरेश कुमार और संजय बंसल को साथ लेकर विजिलेंस टीम रिकॉर्ड खंगाल रही है। 
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भिवानी में नगर परिषद कार्यालय। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल फोटो)
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विस्तार
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हरियाणा के भिवानी में नगर परिषद घोटाले में तत्कालीन चेयरमैन रण सिंह यादव और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव के कुबूलनामे के बावजूद राशि की रिकवरी नहीं होने पर अब आरोपियों की प्रॉपर्टी अटैच की तैयारी हो गई है। घोटाले में आगे की कार्रवाई अब बहुत कुछ नगर परिषद के तत्कालीन सचिव राजेश मेहता और रिमांड पर चल रहे दोनों आरोपी अकाउंटेंट संजय बंसल और सुरेश कुमार के इर्दगिर्द घूम रही है। 

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इसमें आगामी कार्रवाई अब इनके बयानों और बरामदगी पर ही निर्भर है। पहले पिता के निधन और फिर अस्पताल में दाखिल होने के कारण तत्कालीन सचिव राजेश मेहता अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। हालांकि रविवार को दिनभर उसकी गिरफ्तारी की चर्चाएं चलती रहीं, मगर आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

उल्लेखनीय है कि नगर परिषद में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में अब तक पुलिस 14.71 करोड़ के घोटाले का खुलासा कर चुकी है। मामले में नप के दो अकाउंटेंट संजय बंसल और सुरेश कुमार फिलहाल रिमांड पर हैं। संजय बंसल ने खुलासा किया था कि निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव का 60 फीसदी शेयर होता था और बाकी शेयर अन्य का होता था।
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चार-चार दिन के रिमांड के बाद विजिलेंस टीम आरोपी रण सिंह यादव और संजय यादव को जेल भेज चुकी है। इनसे रिकवरी नहीं होने पर अब इनकी प्रॉपर्टी अटैच की जा सकती है, ताकि घोटाले की राशि की रिकवरी हो सके।

हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाने की तैयारी में व्यापारी विनोद
मामले में नामजद आरोपी विनोद अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। उसकी ओर से शनिवार को जिला कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। विजिलेंस की ओर से हवाला दिया गया था कि विनोद का नाम गिरफ्तार अन्य आरोपियों ने लिया है। उससे घोटाले की राशि रिकवरी के अलावा पूछताछ भी की जानी है। अब उक्त व्यापारी की ओर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाने की तैयारी की जा रही है।
 

मामले में खानापूर्ति की जा रही है। घोटाला किया गया है यह बात आरोपी स्वयं कुबूल कर चुके हैं। इसके बावजूद रिकवरी नहीं की गई। इतना ही नहीं उन्हें बचाने के लिए जेल भेज दिया गया। इनकी प्रॉपर्टी अटैच कर घोटाले की राशि रिकवर करनी चाहिए। वह जनता का पैसा है, जो शहर के विकास के लिए आया था। -किरण चौधरी, पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता

 

नप घोटाला बड़े स्तर का है। अब तक तो चेक घोटालों की ही जांच चल रही है, जिसमें भी असल आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। बैंक मैनेजर, फर्म मालिक जैसे छोटे-छोटे आरोपियों से तो रिकवरी की गई और बड़े आरोपियों से कोई रिकवरी नहीं, जबकि वे अपने बयान में स्वयं 10 करोड़ से ज्यादा की राशि लेने की बात कुबूल चुके हैं। सही जांच हो तो चेक घोटाला, जमीन घोटाला करीब 450 करोड़ से अधिक का मिलेगा। -सुदर्शन जिंदल, शिकायतकर्ता

 

मामले में अब पुलिस के साथ-साथ विजिलेंस भी आरोपियों को बचाने में जुटी है। मगर ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। शहरवासियों को साथ लेकर भिवानी बचाओ आंदोलन के तहत आवाज उठाई जाएगी और इस मामले की सीबीआई जांच का दबाव बनाया जाएगा। -सुशील वर्मा, संयोजक, भिवानी बचाओ आंदोलन।

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