हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा ने पूरे मामले में पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो को शिकायत देकर स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की है। वर्मा ने आरोप लगाया कि हेडकांस्टेबल ने बच्ची को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश करने के बजाय अपने परिचित शंकर के हवाले कर दिया। उसने बच्ची को बाल संरक्षण अधिकारी तक नहीं पहुंचाया और न ही वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। उसे निलंबित किया जाना चाहिए। शंकर और अंजलि के अलावा मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच हो।
- बच्ची से शादी कर उसे बंधक बनाकर रखने के आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर अब तक क्यों कार्रवाई नहीं हुई।
- गेस्ट हाउस में साढ़े तीन महीने तक बच्ची का यौन शोषण करने में कौन-कौन लोग शामिल रहे?
- हेड कांस्टेबल की भूमिका के बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई का दायरा सीमित क्यों रहा?
- बच्ची को सीडब्ल्यूसी के हवाले करने के बजाय गेस्ट हाउस तक पहुंचाने का निर्णय किसने लिया? क्या जनरल डायरी, ड्यूटी रजिस्टर और डायल 112 की रिकॉर्डिंग की जांच हुई?
अधिकारी के अनुसार
असम निवासी नाबालिग लड़की के मामले में गेस्ट हाउस संचालक और रोहतक की महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिसकर्मी की भूमिका को लेकर विभागीय जांच कर रहे हैं। बच्ची की काउंसलिंग करवा बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है। - मयंक मिश्रा, पुलिस अधीक्षक, भिवानी।