अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
पंचायत चुनाव की रंजिश को लेकर 30-35 हमलावरों ने शनिवार शाम पांच बजे के करीब छह लोगों पर गंडासे, बरछी, तलवारों से हमला बोला। छहों के शरीर पर धारदार हथियारों के कई वार किए गए। हमले में पूर्व सरपंच के चचेरे भाई की मौत हो गई। पांचों अन्य की हालत नाजुक बताई जा रही है। गोली चलाए जाने की भी बात कही जा रही है। घायलों को हिसार के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। खूनी संघर्ष के बाद सामान्य अस्पताल और गांव में तनाव व्याप्त है। इसे देखते हुए दोनों स्थानों पर भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। शैक्षणिक योग्यता को लेकर मांगी गई आरटीआई के बाद सरपंच बर्खास्त हो चुकी हैं।
बड़ेसरा गांव में पूर्व सरपंच पवन कुमार और सरपंच पति बबलू के बीच चुनावी विवाद चल रहा है। सरपंच बनी महिला के सर्टिफिकेट पर सवाल उठाए गए थे और इसके लिए आरटीआई लगाई गई थी। पूर्व सरपंच के भाई राज कुमार ने इसकी शिकायत की थी। शिकायत के बाद कागजात की जांच हुई और सरपंच को बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद से दोनों पक्षों में चुनावी रंजिश और ज्यादा बढ़ गई। इसी मामले में कुछ दिन पूर्व राज कुमार नामक व्यक्ति को पीटा गया था। यह मामला थाने पहुंच गया था और इसमें केस भी दर्ज हुआ था। शनिवार शाम करीब पांच बजे खेत से घर लौट रहे पूर्व सरपंच के चचेरे भाई करीब 55 वर्षीय बलजीत, उसके पिता 80 वर्षीय सूबे सिंह, करीब 75 वर्षीय भल्लेराम, करीब 80 वर्षीय हुकम सिंह, करीब 85 वर्षीय माल्हाराम और महेंद्र पर करीब तीन दर्जन हथियार बंद लोगों ने हमला कर दिया। आरोप है कि इस दौरान हमलावरों ने गोलियां चलाईं और तेजधार हथियारों का प्रयोग किया। सभी घायलों को गंभीर हालत में उपचार के लिए सामान्य अस्पताल लाया गया। यहां चिकित्सक ने बलजीत को मृत घोषित कर दिया। बाकी चार बुजुर्गों की हालत भी गंभीर बनी हुई है। खून से लथपथ बुजुर्गों को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया, मगर परिजन उन्हें हिसार के एक निजी अस्पताल में ले गए। चुनावी रंजिश में खूनी संघर्ष की सूचना मिलते पुलिस फोर्स गांव पहुंच गई। अस्पताल में भी खासी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। इस कारण अस्पताल में भी तनाव की स्थिति रही। अस्पताल और गांव में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी। परिजन विरेंद्र ने बताया कि सभी बुजुर्ग थे और महज बलजीत 55 वर्ष ही इन सबमें ठीक था। बुजुर्गों पर हमला किया गया। सभी बुजुर्ग खेत से घर आ रहे थे। हमलावर करीब 30-35 लोग थे।
...थाने में दी थी, गोली मारने की धमकी
मारपीट के पुराने मामले को लेकर कुछ दिन पूर्व दोनों पक्षों को थाने में बुलाया गया था। परिजनों ने आरोप लगाया कि एसएचओ के सामने ही सरपंच पक्ष ने 10 दिन के अंदर बलजीत को गोली मारने की धमकी दी थी। उस समय ग्रामीणों ने पुलिस से कहा था कि आरोपी आपके सामने ही धमकी दे रहा है। एक पक्ष ने सुरक्षा की भी मांग की थी। मगर, सुरक्षा नहीं मिली। हमले के बाद परिजनों ने पुलिस पर भी आरोप लगाए। उन्होंने एसएचओ के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। मृतक बलजीत के दो लड़के है। एक सीआईएसएफ में एएसआई है तो दूसरा हरियाणा पुलिस में हवलदार है।
पहले जमीनी विवाद, फिर चुनाव रंजिश
दोनों पक्षों में विवाद वर्षों पुराना है। विवाद जमीन से शुरू हुआ। पहले जमीन पर लंबे समय तक दोनों पक्षों में झगड़ा चला। इसी जमीनी विवाद की रंजिश में सरपंच का चुनाव लड़ना शुरू किया गया। सरपंच बनी बबलू की पत्नी के सर्टिफिकेट पर पूर्व सरपंच के परिवार ने ही आरटीआई लगाकर सवाल उठाए। इसके बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। इसी विवाद में रंजिश बढ़ती चली गई। जमीनी विवाद तो समझौते से अब निपटा लिया गया है, मगर चुनावी रंजिश बरकरार है। इसी रंजिश में शनिवार शाम को हमला किया गया। इसमें बलजीत की जान चली गई।
अभी यह नहीं कहा जा सकता कि बलजीत की मौत तेजधार हथियार से हुई है या गोली लगने से। सुबह पोस्टमार्टम होगा। इसके बाद ही मौत के कारणों का पता लग सकेगा। अभी किसी ने बयान नहीं दिए है। बयान के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। गांव और अस्पताल में पुलिस फोर्स तैनात है और किसी को भी कानून अपने हाथ में नहंीं लेने दिया जाएगा।
चंद्रपाल बिश्नोई, डीएसपी हेड क्वार्टर