भिवानी। फाइनेंस पर लिए वाहन को जाली दस्तावेज तैयार कर बेचने के मामले में न्यायालय के आदेश पर दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है। सिविल लाइन पुलिस थाने में शनिवार को आरोपी महम निवासी मनोज और झज्जर निवासी मंजीत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। इस संबंध में पुलिस कार्रवाई न होने पर शिकायतकर्ता देवेंद्र ने जेएमआईसी की अदालत में इस्तगासा दायर किया था।
पुराना हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी 38 वर्षीय देवेंद्र ने न्यायालय में इस्तगासा दायर कर बताया कि उसने मनोज कुमार वासी किशनगढ़ महम से 16 मई 2020 को वाहन लेने के लिए चेक से चार लाख रुपये का भुगतान किया था। इसके बाद 26 मई को फिर तीन लाख रुपये का दूसरा चेक दिया था। इसी तरह सात अगस्त को एक लाख रुपये का भुगतान किया था। इस संबंध में उसे 28 मई को तहसील कार्यालय से तैयार करवाकर शपथ पत्र दिया था, जिसे नोटरी पब्लिक से सत्यापित भी कराया गया था। उन्होंने देवेंद्र को वाहन की पावर ऑफ अटॉर्नी दे दी थी। जबकि इस वाहन का मालिक मनजीत जाखड़ था, जिसका वास्तविक पता हुमायुपुर झज्जर था, लेकिन मंजीत जाखड़ ने वाहन पर फाइनेंस कंपनी से लोन में दिए दस्तावेजों पर पता हंसावासकलां दादरी का दर्शाया था। मंजीत जाखड़ द्वारा कुलदीप सिंह को वाहन हस्तांतरित कराया गया था। इन लोगों ने आपस में मिलीभगत कर वित्त कंपनी का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी झूठा व फर्जी दस्तावेजों से तैयार कराकर रजिस्ट्रार कार्यालय के समक्ष पेश कर दिया। वाहन को मनोज कुमार के नाम कराने का भी प्रयास किया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसे बाद में पता चला कि फाइनेंस पर लिए वाहन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे मिलीभगत कर धोखाधड़ी से बेचा गया। इस मामले में उसने पहले सीएम विंडो में शिकायत दी थी और संबंधित पुलिस अधिकारियों को भी शिकायत की, मगर आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने जेएमआईसी के न्यायालय में इस्तगासा दायर किया। जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने शनिवार को दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किए जाने के आदेश दिए हैं।