भिवानी। भिवानी की बेटी और भारतीय सेना की नायब सूबेदार जैस्मिन लंबोरिया ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन कर 57 किलो वर्ग के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही भारत के लिए बॉक्सिंग का 10वां कांस्य पदक भी पक्का हो गया। क्वार्टर फाइनल में जैस्मिन ने इंग्लैंड की एलिस ग्लिन को 4-1 के स्प्लिट डिसीजन (जजों के विभाजित फैसले) से हराया। इस जीत के साथ उन्होंने अंतिम चार में जगह सुनिश्चित कर ली।
जीत के बाद जैस्मिन ने कहा कि 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में मैंने कांस्य पदक जीता था। इस बार पदक का रंग बदलने का लक्ष्य है। उन्होंने भारतीय सेना और पुणे स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट के प्रशिक्षकों का आभार जताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग का लाभ उन्हें प्रतियोगिता में मिल रहा है। सीनियर स्तर की बॉक्सिंग प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों की संख्या या भागीदारी जूनियर या यूथ के मुकाबले काफी कम हो जाती है, जबकि आपने इस वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर मेरी उपलब्धि से देश की छोटी बच्चियां खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होती हैं तो इससे बड़ी खुशी कोई नहीं होगी। मेरी वजह से किसी का भविष्य संवरता है तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी। ग्लासगो से खेल प्रेरक एवं अधिवक्ता राजनारायण पंघाल ने बताया कि जैस्मिन ने पूरे मुकाबले में बेहतरीन तकनीक और आक्रामक खेल दिखाया। मेजबान इंग्लैंड की मुक्केबाज को घरेलू दर्शकों का समर्थन मिलने के बावजूद भारतीय मुक्केबाज ने पूरे मुकाबले में अपनी पकड़ बनाए रखी और जीत दर्ज की। कोच एवं चाचा संदीप लंबोरिया ने कहा कि जैस्मिन ने इस प्रतियोगिता के लिए कड़ी मेहनत की है। अब तक के प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें पूरा विश्वास है कि जैस्मिन इस बार स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेगी।
जैस्मिन के पिता होमगार्ड, मां गृहिणी
जैस्मिन लंबोरिया के पिता जयवीर लंबोरिया होमगार्ड हैं और माता जोगिंद्र कौर गृहिणी हैं। जयवीर लंबोरिया के चार बच्चे हैं। तीन बड़ी बेटियां और एक छोटा बेटा। जैस्मिन घर की पहली लड़की हैं जो बॉक्सिंग कर रही हैं। जैस्मिन फिलहाल फिजिकल एजुकेशन में पीजी डिप्लोमा भी कर रही हैं। वर्ष 2021 में जैस्मिन ने खेल कोटे से आर्मी में नौकरी पाई थी।